Nabi mengangkat kedua tangannya ketika masuk shalat, yaitu bertakbir
Imam Nasa'i : 1132
أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا افْتَتَحَ الصَّلَاةَ كَبَّرَ وَرَفَعَ يَدَيْهِ وَإِذَا رَكَعَ وَبَعْدَ الرُّكُوعِ وَلَا يَرْفَعُ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ
हमका [इशाक बिन इब्राहिम] से [सुफयान] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [अपने पिता] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; 'जब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज पढ़ै लागे तौ तकबीर कहिन फिर दुइनौ हाथ उठाइन। वइसने जब तुम झुकै चाहत हौ अऊर झुकै के बाद। उ शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुइ सजदा के बीच मा नाहीं किहिन'।