Allah menjamin orang yang berperang di jalannya, tidak ada yang mendorongnya keluar kecuali karena iman kepadaku dan para rasulku ,untuk mengembalikannya dengan memperoleh pahala atau ghanimah atau memasukkannya ke surga
Imam Bukhari : 35
حَدَّثَنَا حَرَمِيُّ بْنُ حَفْصٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ قَالَ حَدَّثَنَا عُمَارَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو زُرْعَةَ بْنُ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ انْتَدَبَ اللَّهُ لِمَنْ خَرَجَ فِي سَبِيلِهِ لَا يُخْرِجُهُ إِلَّا إِيمَانٌ بِي وَتَصْدِيقٌ بِرُسُلِي أَنْ أُرْجِعَهُ بِمَا نَالَ مِنْ أَجْرٍ أَوْ غَنِيمَةٍ أَوْ أُدْخِلَهُ الْجَنَّةَ وَلَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي مَا قَعَدْتُ خَلْفَ سَرِيَّةٍ وَلَوَدِدْتُ أَنِّي أُقْتَلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ أُحْيَا ثُمَّ أُقْتَلُ ثُمَّ أُحْيَا ثُمَّ أُقْتَلُ
हमसे कहिन [हरामी बिन हफश] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल वाहिद] कहिन, हमसे कहिन [उमारा] कहिन, हमसे कहिन [अबू ज़ुरअह बिन अमरू बिन जरीर] कहिन: हम [अबू हुरैराह] का पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुने रहेन, उ कहिन: 'अल्लाह ओन लोगन का गारंटी देत है जे ओनके रात मा नाहीं जात हैं, मुझमें विश्वास के अलावा ओका बाहर धकेल देत है अऊर जे मोर दूत हैं, ओनका इनाम या घोनिमाह प्राप्त कइके या स्वर्ग मा स्वीकार कइके ओका वापस करै का सही ठहरावत है। अगर ई मोर लोगन पर बोझ न होत, तौ बेशक मैं सरियाह - विशेष बल - के पीछे चुपचाप न बइठत अऊर बेशक अगर मोका अल्लाह के राह मा मारा जात अऊर फिर मोका फिर से जिंदा कीन जात, फिर मोका फिर से मार दीन जात, फिर मोका फिर से जिंदा कीन जात, फिर मोका फिर से मार दीन जात तौ मैं बहुतै पसंद करत।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 5938, 7041, 8620, 8622, 8623, 8821, 9116, 9273, 9619, 9742, 10004, 10038, 10119, 10701, 10894, 11109, 11411, 11671, 11728, 13290, 14404, 15818, 16998, 17359, 17675, 21487, 21521, 21537, 21547, 21552, 21592, 25790, 26110
Imam Bukhari : 35, 2578, 2579, 2580, 2588, 2589, 2590, 2665, 2680, 2750, 2835, 2891, 3474, 3929, 5810, 6013, 6486, 6685, 6686, 6903, 6909
Imam Muslim : 3484, 3485, 3490, 3501, 3502, 3535, 3536, 4195, 4196, 4197, 4198
Imam Abu Dawud : 2126, 4367
Imam Tirmidzi : 1569, 1584, 2203
Imam Nasa'i : 3047, 3054, 3071, 3072, 3073, 3076, 3100, 3101, 3120, 3121, 4943, 4944
Imam Ibnu Majah : 2743, 2766, 3899, 3968
Imam Malik : 849, 850, 871, 882, 883, 1507
Imam Darimi : 2048, 2049, 2284, 2314