Diperangi bani ishaq
Imam Muslim : 5199
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ عَنْ ثَوْرٍ وَهُوَ ابْنُ زَيْدٍ الدِّيلِيُّ عَنْ أَبِي الْغَيْثِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ سَمِعْتُمْ بِمَدِينَةٍ جَانِبٌ مِنْهَا فِي الْبَرِّ وَجَانِبٌ مِنْهَا فِي الْبَحْرِ قَالُوا نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يَغْزُوَهَا سَبْعُونَ أَلْفًا مِنْ بَنِي إِسْحَقَ فَإِذَا جَاءُوهَا نَزَلُوا فَلَمْ يُقَاتِلُوا بِسِلَاحٍ وَلَمْ يَرْمُوا بِسَهْمٍ قَالُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ فَيَسْقُطُ أَحَدُ جَانِبَيْهَا قَالَ ثَوْرٌ لَا أَعْلَمُهُ إِلَّا قَالَ الَّذِي فِي الْبَحْرِ ثُمَّ يَقُولُوا الثَّانِيَةَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ فَيَسْقُطُ جَانِبُهَا الْآخَرُ ثُمَّ يَقُولُوا الثَّالِثَةَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ فَيُفَرَّجُ لَهُمْ فَيَدْخُلُوهَا فَيَغْنَمُوا فَبَيْنَمَا هُمْ يَقْتَسِمُونَ الْمَغَانِمَ إِذْ جَاءَهُمْ الصَّرِيخُ فَقَالَ إِنَّ الدَّجَّالَ قَدْ خَرَجَ فَيَتْرُكُونَ كُلَّ شَيْءٍ وَيَرْجِعُونَ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ مَرْزُوقٍ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ الزَّهْرَانِيُّ حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ بْنُ بِلَالٍ حَدَّثَنَا ثَوْرُ بْنُ زَيْدٍ الدِّيلِيُّ فِي هَذَا الْإِسْنَادِ بِمِثْلِهِ
हमसे कहिन है [कुतैबा बिन सईद] हमसे [अब्दुलअजीज बिन मुहम्मद] से [तसौर बिन जैद अद दिली] से [अबू अल गैट्स] से [अबू हुरैराह] पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'का आपने कभी एक अइसन शहर के बारे मा सुना है जेकर एक तरफ जमीन है अऊर दूसर तरफ समुद्र है'? साथियन ने जवाब दिहिन: हाँ, हे अल्लाह के रसूल। उ आगे कहिन: 'कयामत का दिन तब तक नाहीं होई जब तक कि इशाक के संतानन के सत्तर हजार लोगन द्वारा शहर से लड़ाई नाइ होइ। जब उइ उनके पास आए, तौ उइ युद्ध के मैदान मा उतरि गें, लेकिन उइ तलवार या तीर से नाहीं लड़िन। उइ बस इहै कहत हैं; 'ला इलाहा इल्लाह वल्लाहु अकबर,' तब एक पक्ष का विजय प्राप्त कीन जा सकत है -त्सौर ने कहा: मैं बस इतना जानत हउँ कि उ केवल उ कहिन: जवन समुद्र मा है- फिर दूसरी बार उ लोग कहिन: 'ला इला इल्लाह वल्लाहु अकबर,' तब दूसरा पक्ष जीत लिहिस, फिर तीसरी बार इलालाह कहिन: वल्लाहु अकबर,' तब ओनके किलेबंदी खोल दीन गा ताकि उ लोग घुसि के आपन लूट ले सकै। अऊर जब उइ लूटपाट बाँटत रहें तौ अचानक एक चिल्लाहट सुनाई दिहिस: सचमुच, दज्जल प्रकट होइगा है। उइ आपन सब कुछ छोड़ि के वापस चले गें -अपने देश-'। हमका बतावा है [मुहम्मद बिन मरज़ुक] हमसे कहिन है [बिसिर बिन उमर अज़ जहरानी] हमसे कहिन है [सुलेमान बिन बिलाल] हमसे [तसौर बिन जैद अद दिली] का ई सनाद मा एक समान मटन के साथ बताइन है।