Abu dzar orang pertama kali mengucapkan salam kepada Rasulullah, beliau menjawab: wa alaikas salam
Imam Muslim : 4521
و حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَرْعَرَةَ السَّامِيُّ وَمُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ وَتَقَارَبَا فِي سِيَاقِ الْحَدِيثِ وَاللَّفْظُ لِابْنِ حَاتِمٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا الْمُثَنَّى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا بَلَغَ أَبَا ذَرٍّ مَبْعَثُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَكَّةَ قَالَ لِأَخِيهِ ارْكَبْ إِلَى هَذَا الْوَادِي فَاعْلَمْ لِي عِلْمَ هَذَا الرَّجُلِ الَّذِي يَزْعُمُ أَنَّهُ يَأْتِيهِ الْخَبَرُ مِنْ السَّمَاءِ فَاسْمَعْ مِنْ قَوْلِهِ ثُمَّ ائْتِنِي فَانْطَلَقَ الْآخَرُ حَتَّى قَدِمَ مَكَّةَ وَسَمِعَ مِنْ قَوْلِهِ ثُمَّ رَجَعَ إِلَى أَبِي ذَرٍّ فَقَالَ رَأَيْتُهُ يَأْمُرُ بِمَكَارِمِ الْأَخْلَاقِ وَكَلَامًا مَا هُوَ بِالشِّعْرِ فَقَالَ مَا شَفَيْتَنِي فِيمَا أَرَدْتُ فَتَزَوَّدَ وَحَمَلَ شَنَّةً لَهُ فِيهَا مَاءٌ حَتَّى قَدِمَ مَكَّةَ فَأَتَى الْمَسْجِدَ فَالْتَمَسَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَا يَعْرِفُهُ وَكَرِهَ أَنْ يَسْأَلَ عَنْهُ حَتَّى أَدْرَكَهُ يَعْنِي اللَّيْلَ فَاضْطَجَعَ فَرَآهُ عَلِيٌّ فَعَرَفَ أَنَّهُ غَرِيبٌ فَلَمَّا رَآهُ تَبِعَهُ فَلَمْ يَسْأَلْ وَاحِدٌ مِنْهُمَا صَاحِبَهُ عَنْ شَيْءٍ حَتَّى أَصْبَحَ ثُمَّ احْتَمَلَ قِرْبَتَهُ وَزَادَهُ إِلَى الْمَسْجِدِ فَظَلَّ ذَلِكَ الْيَوْمَ وَلَا يَرَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى أَمْسَى فَعَادَ إِلَى مَضْجَعِهِ فَمَرَّ بِهِ عَلِيٌّ فَقَالَ مَا أَنَى لِلرَّجُلِ أَنْ يَعْلَمَ مَنْزِلَهُ فَأَقَامَهُ فَذَهَبَ بِهِ مَعَهُ وَلَا يَسْأَلُ وَاحِدٌ مِنْهُمَا صَاحِبَهُ عَنْ شَيْءٍ حَتَّى إِذَا كَانَ يَوْمُ الثَّالِثِ فَعَلَ مِثْلَ ذَلِكَ فَأَقَامَهُ عَلِيٌّ مَعَهُ ثُمَّ قَالَ لَهُ أَلَا تُحَدِّثُنِي مَا الَّذِي أَقْدَمَكَ هَذَا الْبَلَدَ قَالَ إِنْ أَعْطَيْتَنِي عَهْدًا وَمِيثَاقًا لَتُرْشِدَنِّي فَعَلْتُ فَفَعَلَ فَأَخْبَرَهُ فَقَالَ فَإِنَّهُ حَقٌّ وَهُوَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا أَصْبَحْتَ فَاتَّبِعْنِي فَإِنِّي إِنْ رَأَيْتُ شَيْئًا أَخَافُ عَلَيْكَ قُمْتُ كَأَنِّي أُرِيقُ الْمَاءَ فَإِنْ مَضَيْتُ فَاتَّبِعْنِي حَتَّى تَدْخُلَ مَدْخَلِي فَفَعَلَ فَانْطَلَقَ يَقْفُوهُ حَتَّى دَخَلَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَدَخَلَ مَعَهُ فَسَمِعَ مِنْ قَوْلِهِ وَأَسْلَمَ مَكَانَهُ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ارْجِعْ إِلَى قَوْمِكَ فَأَخْبِرْهُمْ حَتَّى يَأْتِيَكَ أَمْرِي فَقَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَأَصْرُخَنَّ بِهَا بَيْنَ ظَهْرَانَيْهِمْ فَخَرَجَ حَتَّى أَتَى الْمَسْجِدَ فَنَادَى بِأَعْلَى صَوْتِهِ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَثَارَ الْقَوْمُ فَضَرَبُوهُ حَتَّى أَضْجَعُوهُ فَأَتَى الْعَبَّاسُ فَأَكَبَّ عَلَيْهِ فَقَالَ وَيْلَكُمْ أَلَسْتُمْ تَعْلَمُونَ أَنَّهُ مِنْ غِفَارٍ وَأَنَّ طَرِيقَ تُجَّارِكُمْ إِلَى الشَّامِ عَلَيْهِمْ فَأَنْقَذَهُ مِنْهُمْ ثُمَّ عَادَ مِنْ الْغَدِ بِمِثْلِهَا وَثَارُوا إِلَيْهِ فَضَرَبُوهُ فَأَكَبَّ عَلَيْهِ الْعَبَّاسُ فَأَنْقَذَهُ
अऊर ई मोका बतावा गा है कि [इब्राहिम बिन मुहम्मद बिन अरराह अस सामी] अऊर [मुहम्मद बिन हातिम] दुइनौ के लफाज़ बहुत अलग नाहीं हैं, अऊर ई लफाज़ इब्न हातिम का है, दुइनौ कहिन; हमका ['अब्दुर रहमान बिन महदी] बताइस है; हमका [अल मुत्सना बिन सैद] से [अबू जमरा] से [इब्न अब्बास] से कहिन है; 'जब अबू ज़ार ने खबर सुनी कि मक्का में एक नबी भेजा गया है, तो उनेस से कहा; 'हे उनाईस, मक्का जा! यहिके बाद, मोका उ मनई के बारे मा बतावा जे दावा किहिस कि उ परमेश्वर के प्रेरित रहा जेका स्वर्ग से एक रहस्योद्घाटन मिला रहा। ऊ का कहत है, सुनौ औ फिर बतावा!' फिर उनैस तब तक चले गें जब तक कि उ मक्का नाहीं पहुँच गए अऊर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के बातन का सुनिन। यहिके बाद, उनैस अबू ज़ार के पास लौटिन अऊर कहिन; 'मेरे अवलोकन के अनुसार, नबी, भगवान के दूत, नेक चरित्र सिखाया अऊर अपने शब्दन का संप्रेषित किहिन जवन कविता के समान नाहीं रहे'। अबू धरर कहिन; 'ऐसा लागत है कि मैं आपके कहे से संतुष्ट नाहीं हउँ, हाय उनैस, अऊर मैं अउर जानकारी जानय चाहत हउँ। ओह, यहि कारन, मैं खुदै वहिके जाब। तब अबू ज़ार ने तरह-तरह के सामान तैयार किहिन अऊर पीये के पानी से भरा एक थैला लइ आए। यहिके बाद उ मक्का गें। मक्का पहुँचै पर, उ तुरंत पैगम्बर से मिलै के लिए ग्रैंड मस्जिद गें। हालांकि, काहे से कि उ ओका नाहीं जानत रहा अऊर पूछै से हिचकत रहा, ओका ओसे मिलै मा दिक्कत होत रही। रात होय के बाद ऊ काबा के पास लेट के सोय गवा। इधर अली ने देखिन अऊर उ जानिन कि लेटल मनई एक विदेशी रहा। यहिसे अली सुबह तक ओनमा से कौनो से बिना पूछे व्यक्ति के साथे चला गा। फिर अबू ज़ार पानी के थैली अऊर आपूर्ति मस्जिद मा लइ गें। उ सारा दिन वहिमा रहे, लेकिन उ दुपहरिया तक पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से नाहीं देखेन। फिर उ अपने विश्राम स्थल पर लौटि गा। कुछ देर बाद, अली वहि जगह से गुजरिन अऊर कहिन; 'ई मनई अबहीं तक घरे काहे नाहीं आय? ' अंत मा अली ने ओनका अपने साथ रहै का निमंत्रण दिहिस, बिना केहू के दुइनौ के बीच कुछौ पूछे। तीसरे दिन अबू ज़ार ने पिछले दिन के समान किया। फिर अली ने ओका फिर से अपने साथ रहै का निमंत्रण दिहिस। अली ने अबू ज़ार से पूछा; 'काहे आये हौ ई मक्का नगर मा? ' अबू धरर ने जवाब दिया; 'अगर तुम मोर मार्गदर्शन करै का वादा करब, तौ मैं करब'। तब अबू ज़ार ने अली से कहा कि उनका का मतलब है। उनकर कहानी सुनत अली कहिन; 'असल मा, मुहम्मद सच्चा अहै अऊर उ अल्लाह के दूत अहै। ई सबसे अच्छा है कि तुम कल सुबह मेरे साथ आओ। काहे ते कि अगर तुम्हरे बारे मा कुछ चिन्ता करिहौं तौ तबै मैं उठिहौं, मानो पानी ढारत हौं। एह बरे जहाँ भी जाउँ, मोर पीछे-पीछे चलौ! ' अबू ज़ार अली के पीछे चले, जब तक कि उ दुइनौ पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर मा घुसे। फिर अबू ज़ार रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के व्याख्या सुनिन, जब तक कि उ तुरंत इस्लाम धर्म अपना लिहिन। पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अबू ज़ार से कहा: 'अपने लोगन के घरे जा अऊर इस्लाम के शिक्षा ओन तक पहुँचा जब तक कि तुम इस्लामी धर्म के लिए जीत हासिल न कर ले'। अबू धरर कहिन; 'अल्लाह के कसम जे मोका नियंत्रित करत है, मैं ओनके पास इस्लाम का यथासंभव स्पष्ट रूप से पहुँचा देब'। फिर अबू ज़ार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर से निकले अऊर ग्रैंड मस्जिद चले गें। जब ऊ वहिके पास पहुँचा तौ ऊ अपने फेफड़न के ऊपर से चिल्लाइस अऊर कहिस; 'मैं गवाही देत हउँ कि अकेले अल्लाह के अलावा कौनो योग्य देवता नाहीं है अऊर मैं गवाही देत हउँ कि मुहम्मद अल्लाह के दूत हैं'। ई आह्वान सुनके मक्का शहर के निवासी हैरान होइ गें अऊर एक साथ वहि जगह आ गें जहां से आवाज आवत रही। ई जानय के बाद कि आवाज निकालै वाला व्यक्ति एक विदेशी रहा अऊर मक्का का निवासी नाहीं रहा, तब उइ तुरंत ओका तब तक पीटिन जब तक कि उ गिर न गवा। कुछ देर बाद अब्बास बिन अब्दुल मुथलिब ओनके रक्षा करै आए अऊर कहिन; 'हाय तोहका! पता नही कि जौन मनई का तू पीटत हौ ऊ घिफर जनजाति के है? अऊर का आपका एहसास नाहीं है कि सीरिया के भूमि के लिए आपका व्यापारिक मार्ग निश्चित रूप से घिफर जनजाति के क्षेत्र से होकर गुजरी? ' तब अब्बास ने तुरंत अबू ज़ार का कुरैश लोगन के कोप से बचा लिहिन। अगले दिन, अबू ज़ार इहै करत रहा, जब तक कि कुरैशी मक्का के लोग ओनका पीटै नाहीं आइन। तब अब्बास ओनके कोप से ओनके रक्षा अऊर बचावै के लिए आवा।