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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Mu'adz bin Jabal mendengar kabar Rasulullah bahwa jika berumur panjang, Ia akan melihat Air Tabuk memenuhi taman

Imam Muslim : 4229

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو عَلِيٍّ الْحَنَفِيُّ حَدَّثَنَا مَالِكٌ وَهُوَ ابْنُ أَنَسٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ الْمَكِّيِّ أَنَّ أَبَا الطُّفَيْلِ عَامِرَ بْنَ وَاثِلَةَ أَخْبَرَهُ أَنَّ مُعَاذَ بْنَ جَبَلٍ أَخْبَرَهُ قَالَ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَامَ غَزْوَةِ تَبُوكَ فَكَانَ يَجْمَعُ الصَّلَاةَ فَصَلَّى الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ جَمِيعًا وَالْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ جَمِيعًا حَتَّى إِذَا كَانَ يَوْمًا أَخَّرَ الصَّلَاةَ ثُمَّ خَرَجَ فَصَلَّى الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ جَمِيعًا ثُمَّ دَخَلَ ثُمَّ خَرَجَ بَعْدَ ذَلِكَ فَصَلَّى الْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ جَمِيعًا ثُمَّ قَالَ إِنَّكُمْ سَتَأْتُونَ غَدًا إِنْ شَاءَ اللَّهُ عَيْنَ تَبُوكَ وَإِنَّكُمْ لَنْ تَأْتُوهَا حَتَّى يُضْحِيَ النَّهَارُ فَمَنْ جَاءَهَا مِنْكُمْ فَلَا يَمَسَّ مِنْ مَائِهَا شَيْئًا حَتَّى آتِيَ فَجِئْنَاهَا وَقَدْ سَبَقَنَا إِلَيْهَا رَجُلَانِ وَالْعَيْنُ مِثْلُ الشِّرَاكِ تَبِضُّ بِشَيْءٍ مِنْ مَاءٍ قَالَ فَسَأَلَهُمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ مَسَسْتُمَا مِنْ مَائِهَا شَيْئًا قَالَا نَعَمْ فَسَبَّهُمَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ لَهُمَا مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَقُولَ قَالَ ثُمَّ غَرَفُوا بِأَيْدِيهِمْ مِنْ الْعَيْنِ قَلِيلًا قَلِيلًا حَتَّى اجْتَمَعَ فِي شَيْءٍ قَالَ وَغَسَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهِ يَدَيْهِ وَوَجْهَهُ ثُمَّ أَعَادَهُ فِيهَا فَجَرَتْ الْعَيْنُ بِمَاءٍ مُنْهَمِرٍ أَوْ قَالَ غَزِيرٍ شَكَّ أَبُو عَلِيٍّ أَيُّهُمَا قَالَ حَتَّى اسْتَقَى النَّاسُ ثُمَّ قَالَ يُوشِكُ يَا مُعَاذُ إِنْ طَالَتْ بِكَ حَيَاةٌ أَنْ تَرَى مَا هَاهُنَا قَدْ مُلِئَ جِنَانًا

हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान अद दरमी] हमसे कहिन हैं [अबू अली अल हनफी] हमसे [मलिक] अर्थात् इब्न अनस [अबू जुबैर अल मक्की] से कहिन हैं कि [अबू थुफैल अमीर बिन वत्सिलाह] ने उनसे कहा है [मुआदज बिन जबल] ने उनसे कहा है; ऊ कहत है; 'हम तबुक युद्ध के दौरान रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे यात्रा किहिन। उ यात्रा के दौरान उ असर के साथ ज़हूर नमाज अऊर ईशा के साथ मगरिब मा शामिल भए, जेहिसे एक दिन उ तखीर मनाइन। उ असर के साथे दुपहरिया के नमाज पढ़ै गें। फिर उ लौटि आवा। फिर ईशा के साथ मगरिब के नमाज मा शामिल होवे के लिए फिर से बाहर निकले। इसके बाद उन्होंने कहा : 'भगवान करे कल तुम तबुक के एक झरने के पास पहुँच जाओगे। अऊर तुम दुपहरिया से पहिले वहिके पास नाहीं पहुँचब। यहिसे जे पहिले पहुंचै, मोर पहुंचै से पहिले कत्तौ पानी का हाथ न लगावै। अंत मा हम झरना के पास पहुँचेन, लेकिन वहिसे पहिले हमरे आगे दुइ मनई रहे, अऊर हमने पावा कि झरना बहुत कम पानी छोड़त रहा, लगभग रस्सी के आकार का। मुआडज़ कहिन; फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुइनौ लोगन से पूछिन: 'का तुम पानी का छुए हौ?' उइ जवाब दिहिन; 'अच्छा तब तौ वही है!' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इनके हरकतन का डांटत अऊर आलोचना करत कहिन कि अल्लाह के इच्छा से दुइनौ लोगन से का कहा जाय का चाही। मुआडज़ कहिन; फिर दोस्तन ने अपने हाथन से झरना से पानी थोड़ा-थोड़ा उठावा, जेसे कि ऊ एक बर्तन मा इकट्ठा होइ गवा। पैगम्बर पानी से आपन चेहरा अऊर हाथ धोइन, फिर पानी का झरना मा लौटा दिहिन। तौ एक मूसलाधार झरना पैदा भवा। अबू अली का संदेह रहा कि 'मुनहामीर' या 'गजीर' शब्द का उपयोग -जेकर मतलब है तेज-। यहिसे वहिमा सब लोग पी सकै। फिर उ कहिन: 'हाय, मुआदज़! बहुत देर तक नाहीं, अगर तुम लंबा जियौ, तौ बाद मा तुम ई जगह का बगीचन से भरा देखब'।

Hadith Corroboration :


Imam Ahmad : 21056
Imam Muslim : 4229