Salamah bin Al-Akwa' mengejar sendirian kelompok Ghathafan yang merampas unta Nabi di Dzi Qarad hingga berhasil merebutnya kembali
Imam Muslim : 3371
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا حَاتِمٌ يَعْنِي ابْنَ إِسْمَعِيلَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي عُبَيْدٍ قَالَ سَمِعْتُ سَلَمَةَ بْنَ الْأَكْوَعِ يَقُولُا خَرَجْتُ قَبْلَ أَنْ يُؤَذَّنَ بِالْأُولَى وَكَانَتْ لِقَاحُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرْعَى بِذِي قَرَدٍ قَالَ فَلَقِيَنِي غُلَامٌ لِعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ فَقَالَ أُخِذَتْ لِقَاحُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ مَنْ أَخَذَهَا قَالَ غَطَفَانُ قَالَ فَصَرَخْتُ ثَلَاثَ صَرَخَاتٍ يَا صَبَاحَاهْ قَالَ فَأَسْمَعْتُ مَا بَيْنَ لَابَتَيِ الْمَدِينَةِ ثُمَّ انْدَفَعْتُ عَلَى وَجْهِي حَتَّى أَدْرَكْتُهُمْ بِذِي قَرَدٍ وَقَدْ أَخَذُوا يَسْقُونَ مِنْ الْمَاءِ فَجَعَلْتُ أَرْمِيهِمْ بِنَبْلِي وَكُنْتُ رَامِيًا وَأَقُولُ أَنَا ابْنُ الْأَكْوَعِ وَالْيَوْمُ يَوْمُ الرُّضَّعِ فَأَرْتَجِزُ حَتَّى اسْتَنْقَذْتُ اللِّقَاحَ مِنْهُمْ وَاسْتَلَبْتُ مِنْهُمْ ثَلَاثِينَ بُرْدَةً قَالَ وَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسُ فَقُلْتُ يَا نَبِيَّ اللَّهِ إِنِّي قَدْ حَمَيْتُ الْقَوْمَ الْمَاءَ وَهُمْ عِطَاشٌ فَابْعَثْ إِلَيْهِمْ السَّاعَةَ فَقَالَ يَا ابْنَ الْأَكْوَعِ مَلَكْتَ فَأَسْجِحْ قَالَ ثُمَّ رَجَعْنَا وَيُرْدِفُنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى نَاقَتِهِ حَتَّى دَخَلْنَا الْمَدِينَةَ
हमसे कहिस है [कुतैबा बिन सैद] हमसे कहिस है [हातिम] - अर्थात् इब्न इस्माइल - [यजीद बिन अबू उबैद] से उ कहिन; हम [सलामा बिन अल अक्वा'] का कहत सुने रहेन, 'हम पहिली अज़ान के बोलै से पहिले शहर छोड़ दिहे रहेन, जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के ऊँट ज़ू कार्ड मा चरत रहे'। सलामा ने कहा, 'अचानक अब्दुर्रहमान बिन औफ का गुलाम मेरे पास आया और बोला, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ऊंट लूट गए हैं'। तौ हम पूछेन कि ओका के लूटिस? ऊ जवाब दिहिस, 'बानी घटफान'। सलामह बोली- 'फिर मैंने तीन बार चिल्लाया, 'मदद करो...!' सलामा ने कहा, 'जब तक मदीना शहर के कोने-कोने में मेरी आवाज नहीं सुनी गई, तब तक मैं ज़ू कार्ड में उनसे मिलने के लिए निकली, जब उ लोग पानी के स्रोत से अभी-अभी पी रहे थे, तब मैं गुनगुनाते हुए उन पर तीर फेंक दिया, 'मैं इब्न अल अक्वा हूँ', आज विनाश का दिन है'। मैं अबहियों गुनगुनावत हउँ जब तक कि मैं ओनसे ओकर ऊंट वापस नाहीं ले सकत हउँ, अऊर ओनसे तीस बुरदा कपड़ा नाहीं ले सकत हउँ'। सलामा ने कहा, 'तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कई लोगन के साथ आए, तब मैंने कहा, 'हे अल्लाह के पैगम्बर, सचमुच मैंने उन्हें जल स्रोत से भगा दिया है, भले ही वे बहुत प्यासे थे, तो अब उन्हें उनके पास भेजो'। तौ उ कहिन: 'ओ अल अक्वा, तुम बहुत सही काम किहे हौ'। फिर हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ऊँट पर सवार होइके पीछे सवार होइके घरे लौटि गयेन, जब तक कि हम मदीना शहर मा घुस नाहीं गयेन'।