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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Rasulullah menerima bai’at wanita dengan syarat tidak menyekutukan Allah, tidak mencuri, tidak berzina, dan tidak membunuh anak

Imam Muslim : 3223

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَمْرٌو النَّاقِدُ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَابْنُ نُمَيْرٍ كُلُّهُمْ عَنْ ابْنِ عُيَيْنَةَ وَاللَّفْظُ لِعَمْرٍو قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَجْلِسٍ فَقَالَ تُبَايِعُونِي عَلَى أَنْ لَا تُشْرِكُوا بِاللَّهِ شَيْئًا وَلَا تَزْنُوا وَلَا تَسْرِقُوا وَلَا تَقْتُلُوا النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلَّا بِالْحَقِّ فَمَنْ وَفَى مِنْكُمْ فَأَجْرُهُ عَلَى اللَّهِ وَمَنْ أَصَابَ شَيْئًا مِنْ ذَلِكَ فَعُوقِبَ بِهِ فَهُوَ كَفَّارَةٌ لَهُ وَمَنْ أَصَابَ شَيْئًا مِنْ ذَلِكَ فَسَتَرَهُ اللَّهُ عَلَيْهِ فَأَمْرُهُ إِلَى اللَّهِ إِنْ شَاءَ عَفَا عَنْهُ وَإِنْ شَاءَ عَذَّبَهُ حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَزَادَ فِي الْحَدِيثِ فَتَلَا عَلَيْنَا آيَةَ النِّسَاءِ { أَنْ لَا يُشْرِكْنَ بِاللَّهِ شَيْئًا } الْآيَةَ

हमसे कहिन है [यह्या बिन याह्या अत तमीमी] अऊर [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अमरू अन नकिद] अऊर [इशाक बिन इब्राहिम] अऊर [इब्नू नुमीर] कि उ सब [इब्न उयैना] से हैं, जबकि लफादज़ अमरू से हैं, उ कहिन; हमसे [इब्न 'उयैना] से [अज़ जुहरी] से [अबू इदरीस] से ['उबादह बिन शमीत] से कहिन है, 'जब हम रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे एक मजलिस मा रहेन, त उ कहिन: 'मोरे साथ निष्ठा करा कि तुम अल्लाह के साथे कुछौ के साथ साथी न करब, वयस्कता न करब, वयस्कता न करब अऊर न मारौ जेका अल्लाह हक के अलावा मना किहिन है। तुममें से जे ई वादा पूरा करी, ओकर इनाम अल्लाह के पास होई। जे ई वादा तोड़त है, लेकिन अल्लाह ओकर गलती का छुपावत है -दूसरन से अनजान-, तब ओकर काम अल्लाह पर निर्भर करत है; अगर उ चाहत है, तौ ओका माफ कीन जाई, लेकिन अगर उ चाहत है, तौ ओका दंडित कीन जाई -परलोक मा-'। हमसे कहिन है [अब्द बिन हुमैद] हमसे कहिन है [अब्दुर्राजाक] हमसे [मामर] से [अज जुहरी] से एक इस तरह के सनाद के साथ कहिन हैं, अऊर अपने हदीस मा उ कहिन, 'फिर उ हमका ई आयत पढ़िन -पत्र मा-अन निसा': '-तुमका अल्लाह के साथ साथी नाहीं बनावै चाही'-प्रश्न। अल मुमलाहनाह: 12-।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 4300, 5025, 5048, 5202, 6554, 7434, 13245, 13925, 14618, 15449, 15450, 17397, 17402, 17827, 18441, 19075, 19076, 19866, 19940, 19973, 20002, 20087, 21046, 21058, 21082, 21616, 21622, 21673, 21680, 21692, 22868, 24020, 24042, 25816, 25882, 26046
Imam Bukhari : 17, 3603, 3604, 3698, 6286, 6303, 6365, 6673, 6914
Imam Muslim : 1729, 3213, 3214, 3223, 3224
Imam Abu Dawud : 1399, 3863
Imam Tirmidzi : 1359, 2657, 3069
Imam Nasa'i : 456, 4010, 4091, 4092, 4107, 4139, 4916
Imam Ibnu Majah : 2547, 2858
Imam Darimi : 2345