Ada empat bulan haram dalam 12 bulan
Imam Muslim : 3179
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَيَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ وَتَقَارَبَا فِي اللَّفْظِ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ ابْنِ أَبِي بَكْرَةَ عَنْ أَبِي بَكْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ إِنَّ الزَّمَانَ قَدْ اسْتَدَارَ كَهَيْئَتِهِ يَوْمَ خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ السَّنَةُ اثْنَا عَشَرَ شَهْرًا مِنْهَا أَرْبَعَةٌ حُرُمٌ ثَلَاثَةٌ مُتَوَالِيَاتٌ ذُو الْقَعْدَةِ وَذُو الْحِجَّةِ وَالْمُحَرَّمُ وَرَجَبٌ شَهْرُ مُضَرَ الَّذِي بَيْنَ جُمَادَى وَشَعْبَانَ ثُمَّ قَالَ أَيُّ شَهْرٍ هَذَا قُلْنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَسَكَتَ حَتَّى ظَنَنَّا أَنَّهُ سَيُسَمِّيهِ بِغَيْرِ اسْمِهِ قَالَ أَلَيْسَ ذَا الْحِجَّةِ قُلْنَا بَلَى قَالَ فَأَيُّ بَلَدٍ هَذَا قُلْنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَسَكَتَ حَتَّى ظَنَنَّا أَنَّهُ سَيُسَمِّيهِ بِغَيْرِ اسْمِهِ قَالَ أَلَيْسَ الْبَلْدَةَ قُلْنَا بَلَى قَالَ فَأَيُّ يَوْمٍ هَذَا قُلْنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَسَكَتَ حَتَّى ظَنَنَّا أَنَّهُ سَيُسَمِّيهِ بِغَيْرِ اسْمِهِ قَالَ أَلَيْسَ يَوْمَ النَّحْرِ قُلْنَا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَإِنَّ دِمَاءَكُمْ وَأَمْوَالَكُمْ قَالَ مُحَمَّدٌ وَأَحْسِبُهُ قَالَ وَأَعْرَاضَكُمْ حَرَامٌ عَلَيْكُمْ كَحُرْمَةِ يَوْمِكُمْ هَذَا فِي بَلَدِكُمْ هَذَا فِي شَهْرِكُمْ هَذَا وَسَتَلْقَوْنَ رَبَّكُمْ فَيَسْأَلُكُمْ عَنْ أَعْمَالِكُمْ فَلَا تَرْجِعُنَّ بَعْدِي كُفَّارًا أَوْ ضُلَّالًا يَضْرِبُ بَعْضُكُمْ رِقَابَ بَعْضٍ أَلَا لِيُبَلِّغْ الشَّاهِدُ الْغَائِبَ فَلَعَلَّ بَعْضَ مَنْ يُبَلِّغُهُ يَكُونُ أَوْعَى لَهُ مِنْ بَعْضِ مَنْ سَمِعَهُ ثُمَّ قَالَ أَلَا هَلْ بَلَّغْتُ قَالَ ابْنُ حَبِيبٍ فِي رِوَايَتِهِ وَرَجَبُ مُضَرَ وَفِي رِوَايَةِ أَبِي بَكْرٍ فَلَا تَرْجِعُوا بَعْدِي
हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [यह्या बिन हबीब अल हरिस्टी] से कहिन है जब ओनके लफाद एक दूसरे के करीब रहे, दुइनौ कहिन; हमसे [अब्दुल वहाब अत त्साकाफी] से [अय्यूब] से [इब्न सिरिन] से [इब्न अबू बकरा] से [अबू बकरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है, कि उ कहिन: 'वास्तव मा, युग घूमत रहत है, ठीक वइसने जइसे जब अल्लाह आकाश अऊर पृथ्वी का बनाइन, ओनमा बारह महीना अऊर चार महीना हैं हराम महीना हैं, अऊर ओनमा से तीन लगातार महीना हैं, अर्थात्; धुल कादह, धुल हिज्जा, मोहर्रम अऊर रजब। इ बीच, रजब का महीना मुद्ज़र का महीना है, यानी जुमादिल आखिर अऊर स्या'बान के बीच स्थित महीना। तब पूछिन : 'अब कौन महिना आय?' हम जवाब दिहेन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। एक क्षण चुप रहे, जब तक हमका शक न होइ गवा कि ईका दुसरे नाम से पुकारिहैं, फिर बोले: 'का अब धूल हिज्जा का महीना नाहीं है?' हम जवाब दिहेन, 'ठीक है'। ऊ फिर पूछिस: 'ई कौन देस आय?' हम जवाब दिहेन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। कुछ पल के लिए उ चुप रहे, जब तक हम नाहीं सोचा कि उ ओका दूसर नाम से पुकारिहैं, फिर उ कहिन: 'का हम अब बलदाह के देस मा नाहीं हई?' हम जवाब दिहेन, 'ठीक है'। ऊ फिर पूछिस- 'कौन दिन आय?' हम जवाब दिहेन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। ऊ एक पल के लिए चुप रहा, जब तक हम नाहीं सोचा कि ऊ ओका दूसर नाम से पुकारिहैं। तब उन्होंने कहा : 'क्या अब नहर -बलिदान- का दिन नहीं है ?' हमने जवाब दिया, 'सही बात है हे अल्लाह के रसूल'। फिर उ कहिन: 'हे मुसलमान, सचमुच आपका खून, आपका संपत्ति - मुहम्मद कहिन; हमका लागत है कि उ इहौ कहिन: अऊर तोहार इज्जत तोहरे लिए हराम है, ठीक वइसने जइसे आज तोहरे लिए, तोहरे देश मा अऊर ई महीना मा हराम है। दरअसल, आप निश्चित रूप से अपने रब्ब से मिलब - पुनरुत्थान के दिन -, अऊर उ आपसे आपके सब कामन के बारे मा पूछिहैं। यहिसे, मोर मरय के बाद, अविश्वास या धर्मत्याग मा न लौटौ - जहाँ आप मा से कुछ लोग दूसरन का मार डारिन -, जे लोग ई समय मौजूद हैं, ओन लोगन का ई बात का ओन लोगन तक पहुँचावै दें, जे लोग मौजूद नाहीं हैं, ई होइ सकत है कि जे लोग दूसर मुँह से सुनत हैं, उ लोग वास्तव मा ओन लोगन के तुलना मा जवन सुनत हैं, ओन लोगन के तुलना मा अधिक रखवाली करत हैं, जे ओन लोगन का सीधे सुनत हैं'। यहिके बाद ऊ कहिस: 'का हम तुम सबका नाहीं बतायेन?' इब्न हबीब ने अपने इतिहास में कहा है कि 'रजब का महीना मुडलर है'। इ बीच, अबू बकर के रिवायत मा, ई कहा गा है, 'त मोर मउत के बाद - अविश्वास मा - वापस न लौटौ'।