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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Nadzar dalam maksiat dan di luar kemampuan tidak wajib dilaksanakan

Imam Muslim : 3099

و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ وَاللَّفْظُ لِزُهَيْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَبِي الْمُهَلَّبِ عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ قَالَ كَانَتْ ثَقِيفُ حُلَفَاءَ لِبَنِى عُقَيْلٍ فَأَسَرَتْ ثَقِيفُ رَجُلَيْنِ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَسَرَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا مِنْ بَنِي عُقَيْلٍ وَأَصَابُوا مَعَهُ الْعَضْبَاءَ فَأَتَى عَلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ فِي الْوَثَاقِ قَالَ يَا مُحَمَّدُ فَأَتَاهُ فَقَالَ مَا شَأْنُكَ فَقَالَ بِمَ أَخَذْتَنِي وَبِمَ أَخَذْتَ سَابِقَةَ الْحَاجِّ فَقَالَ إِعْظَامًا لِذَلِكَ أَخَذْتُكَ بِجَرِيرَةِ حُلَفَائِكَ ثَقِيفَ ثُمَّ انْصَرَفَ عَنْهُ فَنَادَاهُ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ يَا مُحَمَّدُ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَحِيمًا رَقِيقًا فَرَجَعَ إِلَيْهِ فَقَالَ مَا شَأْنُكَ قَالَ إِنِّي مُسْلِمٌ قَالَ لَوْ قُلْتَهَا وَأَنْتَ تَمْلِكُ أَمْرَكَ أَفْلَحْتَ كُلَّ الْفَلَاحِ ثُمَّ انْصَرَفَ فَنَادَاهُ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ يَا مُحَمَّدُ فَأَتَاهُ فَقَالَ مَا شَأْنُكَ قَالَ إِنِّي جَائِعٌ فَأَطْعِمْنِي وَظَمْآنُ فَأَسْقِنِي قَالَ هَذِهِ حَاجَتُكَ فَفُدِيَ بِالرَّجُلَيْنِ قَالَ وَأُسِرَتْ امْرَأَةٌ مِنْ الْأَنْصَارِ وَأُصِيبَتْ الْعَضْبَاءُ فَكَانَتْ الْمَرْأَةُ فِي الْوَثَاقِ وَكَانَ الْقَوْمُ يُرِيحُونَ نَعَمَهُمْ بَيْنَ يَدَيْ بُيُوتِهِمْ فَانْفَلَتَتْ ذَاتَ لَيْلَةٍ مِنْ الْوَثَاقِ فَأَتَتْ الْإِبِلَ فَجَعَلَتْ إِذَا دَنَتْ مِنْ الْبَعِيرِ رَغَا فَتَتْرُكُهُ حَتَّى تَنْتَهِيَ إِلَى الْعَضْبَاءِ فَلَمْ تَرْغُ قَالَ وَنَاقَةٌ مُنَوَّقَةٌ فَقَعَدَتْ فِي عَجُزِهَا ثُمَّ زَجَرَتْهَا فَانْطَلَقَتْ وَنَذِرُوا بِهَا فَطَلَبُوهَا فَأَعْجَزَتْهُمْ قَالَ وَنَذَرَتْ لِلَّهِ إِنْ نَجَّاهَا اللَّهُ عَلَيْهَا لَتَنْحَرَنَّهَا فَلَمَّا قَدِمَتْ الْمَدِينَةَ رَآهَا النَّاسُ فَقَالُوا الْعَضْبَاءُ نَاقَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ إِنَّهَا نَذَرَتْ إِنْ نَجَّاهَا اللَّهُ عَلَيْهَا لَتَنْحَرَنَّهَا فَأَتَوْا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرُوا ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ بِئْسَمَا جَزَتْهَا نَذَرَتْ لِلَّهِ إِنْ نَجَّاهَا اللَّهُ عَلَيْهَا لَتَنْحَرَنَّهَا لَا وَفَاءَ لِنَذْرٍ فِي مَعْصِيَةٍ وَلَا فِيمَا لَا يَمْلِكُ الْعَبْدُ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ حُجْرٍ لَا نَذْرَ فِي مَعْصِيَةِ اللَّهِ حَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ الْعَتَكِيُّ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ يَعْنِي ابْنَ زَيْدٍ ح و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ عَنْ عَبْدِ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيِّ كِلَاهُمَا عَنْ أَيُّوبَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَفِي حَدِيثِ حَمَّادٍ قَالَ كَانَتْ الْعَضْبَاءُ لِرَجُلٍ مِنْ بَنِي عُقَيْلٍ وَكَانَتْ مِنْ سَوَابِقِ الْحَاجِّ وَفِي حَدِيثِهِ أَيْضًا فَأَتَتْ عَلَى نَاقَةٍ ذَلُولٍ مُجَرَّسَةٍ وَفِي حَدِيثِ الثَّقَفِيِّ وَهِيَ نَاقَةٌ مُدَرَّبَةٌ

अऊर हमसे [जुहैर बिन हरब] अऊर [अली बिन उज्र अस सादी] कहिन है जबकि जुहैर से लफादज दुइनौ कहिन, हमसे कहिन है [इस्माइल बिन इब्राहिम] हमसे [अय्यूब] से [अबू किलाबाह] से [अबू अल मुहल्लिब] से ['इमरान बिन हुशैन] से कहिन है कि त्सिफ तब बनी उकाइल के सेवक रहे, बानी त्साकिफ ने दुइ दोस्तन का पकड़ लिहिन पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, जबकि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथियन ने अपने ऊँट के साथे बनू उकैल से केहू का पकड़ लिहिन। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब उनके पास आए जब उ बंधे रहे, कैदी आदमी ने कहा, 'हे मुहम्मद!' उ जवाब दिहिन: 'तुमका का बुराई है?' ऊ आदमी कहिस, 'तोहार का कारण है मोका पकड़ै का, अऊर मोर तेज दौड़त ऊँट का पकड़ै का का कारन है?' उ जवाब दिहिस: 'मैंने तोहरे सहयोगी, त्साकिफ के पापन के बदला लेय के रूप मा अइसन किहिन!' फिर उ चल दिहिन। आदमी ने फिर आवाज लगाई कि हे मुहम्मद, हे मुहम्मद! -रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक प्यार अऊर विनम्र व्यक्ति रहे- फिर उ उनके पास वापस आए अऊर कहिन: 'तुमका का चाही?' आदमी जवाब दिहिस, 'अब मैं मुसलमान हौं'। उ कहिन: 'अगर तुम जवन कहत हौ ऊ सच है, अऊर तुम अपने कामकाज का नियंत्रित कर सकत हौ, तौ तुमका वाकई सब किस्मत मिल जाई'। फिन ऊ जाये लाग, मुला ऊ मनई ओका आवाज लगाइस, कहि- ‘हे मुहम्मद, हे मुहम्मद’। फिर उ उनसे मिले अऊर कहिन: 'तुमका का चाही?' ऊ आदमी कहिस, 'मोका भूख लागत है तौ मोका खाना दइ द्या, अऊर मोका पियास भी लाग है तौ मोका कुछ पियै का दइ द्या!' उ कहिन: 'ई तोहार जरूरत है'। बाद मा, आदमी का दुई मनई -नबी के दोस्त-' द्वारा छुड़ावा गा रहा। इमरान ने कहा, 'तब एक अंसार औरत का पकड़ लिहिस - दुश्मन द्वारा - ओकरे ऊँट के साथे जेका आमतौर पर अदलबा` कहा जात है, अंशर औरत का बांध दीन गा रहा, जबकि उ समय लोग - लुटेरे - आराम करत रहे, जबकि ऊँट - चोरी के सामान - ओनके स्टॉप के सामने पेन किहे रहे। तब अंसार मेहरारू अपने बंधन ते छुटकारा पाइ के तुरतै ऊँट के कलम मा चली गईं, मुला हर बार ऊँट के पास सवारी करै आवत रही तौ ऊँट फुंफकारत रहा, सो ऊ 'अदलबा' से मिलै तक छोड़ि देत रही। यहिसे उ सुप्रशिक्षित आज्ञाकारी ऊँट का ओकरे पीठ पर चढ़ाइस। फिर ऊ ओका तब तक डांटत रहा जब तक कि ऊ तेजी से न भागि गा। सोवत रहैं वाले मड़ई अंसार मेहरिया के भागै से हैरान होइगें, तौ उंई वहिके पीछा करिन, पै पकड़ नहीं पाये। औरत ने प्रण किया कि अगर अल्लाह बचाए तो 'अदलबा' ऊंट का वध कर देगी। मदीना पहुंचकर लोग ऊँट देखे, फिर बोले, 'ई अल अदलबा है', रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का ऊंट!'। औरत कहिन - संपादकीय रूप से -, 'अगर अल्लाह ओका बचाइहैं, तौ ऊ ऊँट का वध करिहैं'। फिर लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले अऊर ओनका उनके नज़र के बारे मा बताइन। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम टिप्पणी किहिन: 'सुबनाल्लाह, ओनसे ओकर बदला केतना बुरा है, उ अल्लाह से प्रण लिहिन कि अगर अल्लाह ओनका बचाइहैं, तौ उ ओनका वध करिहैं, अल्लाह के अवज्ञा मा व्रत निभावै के कौनो बाध्यता नाहीं है अऊर न कि अइसन चीज के लिए जेकर स्वामित्व नौकर के न होय'। इब्न हुजर के इतिहास मा, ई कहा गा है; 'अल्लाह के अवज्ञा मा नज़र नाहीं होत है'। हमसे कहिन है [अबू अर रबी' अल 'अताकी] हमसे कहिन हैं [हम्मद] -अर्थात इब्न जैद-। -दूसरे तरीका से ई बतावा गा है- ई हमका [इशाक बिन इब्राहिम] अऊर [इब्न अबू उमर] से [अब्दुल वहाब अत्स त्साकाफी] दुइनौ से [अय्यूब] से सनद के साथ बतावा गा है। अऊर हम्माद के हदीस मा, उ कहत हैं, 'अदलबा' एक ऊँट रहा जवन बानू 'उकैल मा से एक रहा, अऊर उ ओन ऊंटन में से एक रहा जवन बहुत तेजी से दौड़त रहा।' और हदीस में यह भी बताया गया है कि 'फिर वह नारी - अंसार - एक बहुत प्रशिक्षित ऊंट के पास आई'। अऊर अत त्साकाफी हदीस मा संपादकीय के साथे कहा गा है, 'नकातुन मुदर्राबतुन - प्रशिक्षित ऊँट -'।

Hadith Corroboration :