Nabi menegur orang yang bersumpah tidak akan berbuat baik dalam pertengkaran utang, hingga ia melepaskan tuntutannya
Imam Muslim : 2911
و حَدَّثَنِي غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِنَا قَالُوا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي أُوَيْسٍ حَدَّثَنِي أَخِي عَنْ سُلَيْمَانَ وَهُوَ ابْنُ بِلَالٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي الرِّجَالِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ أُمَّهُ عَمْرَةَ بِنْتَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَتْ سَمِعْتُ عَائِشَةَ تَقُولُ سَمِعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَوْتَ خُصُومٍ بِالْبَابِ عَالِيَةٍ أَصْوَاتُهُمَا وَإِذَا أَحَدُهُمَا يَسْتَوْضِعُ الْآخَرَ وَيَسْتَرْفِقُهُ فِي شَيْءٍ وَهُوَ يَقُولُ وَاللَّهِ لَا أَفْعَلُ فَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَيْهِمَا فَقَالَ أَيْنَ الْمُتَأَلِّي عَلَى اللَّهِ لَا يَفْعَلُ الْمَعْرُوفَ قَالَ أَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَلَهُ أَيُّ ذَلِكَ أَحَبَّ
हमसे कहिन [न केवल हमरे एक दोस्त] उ कहिन; हमसे कहिन है [इस्माइल बिन अबी उवैस] ने [सुलेमान] से [मेरे भाई] - अर्थात् इब्नू बिलाल - [यह्या बिन सैद] से [अबू अर रिजाल मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान] से कहा है कि उनकी माँ ['अमराह बिन अब्दुर्रहमान] ने कहा है; हम ['ऐस्याह] का कहत सुने रहेन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने एक बार अपने घर के दरवाजे के पास लड़ाई के आवाज सुनी, आवाज बहुत जोर से रही, जाहिर तौर पर ओनमा से एक ने अपने कर्ज से राहत माँगिन अऊर ओका स्थगित करै का कहिन। लेकिन उ - उ व्यक्ति जे कर्ज मा रहा - वास्तव मा जवाब दिहिस, 'अल्लाह के कसम, हम ई कभी नाहीं करब!' यह सुनकर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तुरंत दोनों से मिलने बाहर आए और बोले: 'वह कौन था जिसने अच्छा काम न करे का कसम खाई थी?' ऊ आदमी जवाब दिहिस, 'मैं हौं, हे अल्लाह के रसूल'। उ कहिन: 'दुइनौ मा से कौन - प्यार के ज्यादा लायक है?!'