Orang yang menanam pohon atau menebar benih lalu dimanfaatkan makhluk hidup akan mendapat pahala
Imam Muslim : 2900
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ جَابِرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يَغْرِسُ غَرْسًا إِلَّا كَانَ مَا أُكِلَ مِنْهُ لَهُ صَدَقَةً وَمَا سُرِقَ مِنْهُ لَهُ صَدَقَةٌ وَمَا أَكَلَ السَّبُعُ مِنْهُ فَهُوَ لَهُ صَدَقَةٌ وَمَا أَكَلَتْ الطَّيْرُ فَهُوَ لَهُ صَدَقَةٌ وَلَا يَرْزَؤُهُ أَحَدٌ إِلَّا كَانَ لَهُ صَدَقَةٌ
हमसे कहिस है [इब्न नुमीर] हमसे कहिस है [मेरे पिता] हमसे [अब्दुल मलिक] [अथा] से [जाबिर] से कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कोऊ मुसलमान तब तक फसल नहीं लगावत है जब तक कि ऊ हर पौधा खात है, ऊ ओकरे लिए दान न हो, कोई ओकरे पास से जवन चोरी करत है ऊ ओकरे लिए दान बन जात है, जंगली जानवर जवन खात है ऊ ओकरे लिए दान बन जात है, जवन चिरई खात है ऊ ओकरे लिए दान बन जात है, अऊर जवन चिरई खात है ऊ ओकरे लिए दान हो जात है, अऊर ओसे कोई नहीं लेत है, बल्कि उ ओकरे लिए दान बन जात है'।