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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Larangan bercelak bagi wanita yang ditinggal mati suaminya hingga selesai empat bulan sepuluh hari

Imam Muslim : 2734

و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ نَافِعٍ قَالَ سَمِعْتُ زَيْنَبَ بِنْتَ أُمِّ سَلَمَةَ تُحَدِّثُ عَنْ أُمِّهَا أَنَّ امْرَأَةً تُوُفِّيَ زَوْجُهَا فَخَافُوا عَلَى عَيْنِهَا فَأَتَوْا النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاسْتَأْذَنُوهُ فِي الْكُحْلِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ كَانَتْ إِحْدَاكُنَّ تَكُونُ فِي شَرِّ بَيْتِهَا فِي أَحْلَاسِهَا أَوْ فِي شَرِّ أَحْلَاسِهَا فِي بَيْتِهَا حَوْلًا فَإِذَا مَرَّ كَلْبٌ رَمَتْ بِبَعْرَةٍ فَخَرَجَتْ أَفَلَا أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا و حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ نَافِعٍ بِالْحَدِيثَيْنِ جَمِيعًا حَدِيثِ أُمِّ سَلَمَةَ فِي الْكُحْلِ وَحَدِيثِ أُمِّ سَلَمَةَ وَأُخْرَى مِنْ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَيْرَ أَنَّهُ لَمْ تُسَمِّهَا زَيْنَبَ نَحْوَ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرٍ

अऊर हमसे कहिके [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] [हुमैद बिन नफी] से कहिन है, उ कहिन; हम सुने रहेन कि [ज़ैनब बिन्त उम्म सलामा] [अपनी महतारी] से कहिन रहैं कि एक औरत का उनके पति मृत छोड़ दिहिन रहैं, यहिसे उनके परिवार वाले चिंतित रहैं कि उनकर आँखिन मा फूलि गें रहैं -काहे से कि उ बहुत रोवत रहैं-, फिर उइ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गें अऊर ओनका नुकसान पहुँचावै के अनुमति माँगिन, रसलूल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: पहिले, आप में से एक का एक साल के लिए सबसे खराब घर में रखा जात रहा, अगर एक कुत्ता वहिके पास से गुजरत रहा, तौ उ ओपे गंदगी फेंक देत रहा, बाहर जाय के अनुमति देय से पहिले, का उ चार महीना अऊर दस दिन इंतजार नाहीं करत रहा?'। अऊर हमसे कहिस है ['उबैदुल्लाह बिन मुआज़] हमसे कहिस है [मेरे पिता] हमका [स्यूबाह] [हुमैद बिन नफी'] से दुइ हदीस के साथ बताइस है।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 17135, 25293, 25433
Imam Bukhari : 4920, 4921, 5271
Imam Muslim : 2732, 2734, 2735
Imam Abu Dawud : 1956, 1964
Imam Nasa'i : 3444, 3445, 3477, 3483, 3484, 3485
Imam Ibnu Majah : 2074, 2075
Imam Malik : 1098