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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Perintah melaksanakan haji bagi yang mampu

Imam Muslim : 2380

و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا الرَّبِيعُ بْنُ مُسْلِمٍ الْقُرَشِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ زِيَادٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ خَطَبَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَيُّهَا النَّاسُ قَدْ فَرَضَ اللَّهُ عَلَيْكُمْ الْحَجَّ فَحُجُّوا فَقَالَ رَجُلٌ أَكُلَّ عَامٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَسَكَتَ حَتَّى قَالَهَا ثَلَاثًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَوْ قُلْتُ نَعَمْ لَوَجَبَتْ وَلَمَا اسْتَطَعْتُمْ ثُمَّ قَالَ ذَرُونِي مَا تَرَكْتُكُمْ فَإِنَّمَا هَلَكَ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ بِكَثْرَةِ سُؤَالِهِمْ وَاخْتِلَافِهِمْ عَلَى أَنْبِيَائِهِمْ فَإِذَا أَمَرْتُكُمْ بِشَيْءٍ فَأْتُوا مِنْهُ مَا اسْتَطَعْتُمْ وَإِذَا نَهَيْتُكُمْ عَنْ شَيْءٍ فَدَعُوهُ

अऊर हमसे कहिस है [जुहैर बिन हरब] हमसे कहिस है [यजीद बिन हारून] हमसे कहिस है [अर रबी' बिन मुस्लिम अल करासी] से [मुहम्मद बिन जियाद] से [अबू हुरैरा] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमको उपदेश दिया और कहा कि हे लोग अल्लाह ने आपके लिए हज करना अनिवार्य कर दिया है। यहिसे हज तीर्थयात्रा करौ'। तब एक आदमी ने पूछा कि या रसूल अल्लाह हर साल होता है? ऊ एक पल के लिए चुप रहा, जब तक कि ऊ आदमी तीन बार दोहराइस। यहिसे उ कहिन: 'अगर हम 'हाँ' का जवाब देब तौ ई निश्चित रूप से हर साल एक दायित्व बन जाई अऊर आप ईका निभावै में सक्षम नाहीं होइब। यहिसे, जवन समस्या हम आपके लिए छोड़त हई, वइसने रहन दें। सचमुच, आपसे पहिले वालेन का दुर्भाग्य का सामना करै का पड़ा काहे से कि उ बहुत ज्यादा सवाल पूछिन अऊर अपने नबियन से बहस करब पसंद किहिन। यहिसे, अगर मैं तोहका कुछ करै का आदेश देत हौं, तौ जतना अच्छा होइ सकै, करौ, अऊर अगर मैं तोहका कुछ करै से मना करौं, तौ तुरंत बंद करौ'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 6453, 7063, 7188, 7797, 8310, 9158, 9404, 9507, 9646, 9865, 10025, 10127, 10199, 24134
Imam Bukhari : 6744
Imam Muslim : 2380, 4348, 4818
Imam Tirmidzi : 2442
Imam Nasa'i : 4122, 4123
Imam Ibnu Majah : 1, 2, 3