Imam Muslim : 2249
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ حُصَيْنٍ عَنْ كَثِيرِ بْنِ مُدْرِكٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَنَحْنُ بِجَمْعٍ سَمِعْتُ الَّذِي أُنْزِلَتْ عَلَيْهِ سُورَةُ الْبَقَرَةِ يَقُولُ فِي هَذَا الْمَقَامِ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ
अऊर हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबुल अह्वाश] से [हुशैन] से [कत्सिर बिन मुद्रिक] से [अब्दुर्रहमान बिन यजीद] कहिस है; [अब्दुल्ला] कहिन जब हम जाम मा रहेन'; हम एक मनई का सुने हई जे ओनके ऊपर अल बकराह के पत्र प्रकट किहिन रहा, अर्थात् ई जगह पढ़त रहा: 'लब्बैका अल्लाहुम्मा लब्बैका -हे अल्लाह, हम तोहार आह्वान पूरा करत हई, हम तोहार आह्वान पूरा करत हई-'।