Rasulullah mandi janabah pada awal malam atau akhir malam
Imam Muslim : 1223
و حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَقَ ح و حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ قَالَ سَأَلْتُ الْأَسْوَدَ بْنَ يَزِيدَ عَمَّا حَدَّثَتْهُ عَائِشَةُ عَنْ صَلَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ كَانَ يَنَامُ أَوَّلَ اللَّيْلِ وَيُحْيِ آخِرَهُ ثُمَّ إِنْ كَانَتْ لَهُ حَاجَةٌ إِلَى أَهْلِهِ قَضَى حَاجَتَهُ ثُمَّ يَنَامُ فَإِذَا كَانَ عِنْدَ النِّدَاءِ الْأَوَّلِ قَالَتْ وَثَبَ وَلَا وَاللَّهِ مَا قَالَتْ قَامَ فَأَفَاضَ عَلَيْهِ الْمَاءَ وَلَا وَاللَّهِ مَا قَالَتْ اغْتَسَلَ وَأَنَا أَعْلَمُ مَا تُرِيدُ وَإِنْ لَمْ يَكُنْ جُنُبًا تَوَضَّأَ وُضُوءَ الرَّجُلِ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ صَلَّى الرَّكْعَتَيْنِ
अऊर ई हमसे कहा गा है [अहमद बिन यूनुस] हमसे कहिन है [जुहैर] हमसे कहिन है [अबू इशाक], -अऊर ई दूसर मार्ग से बतावा गा है- हमसे कहिन है [यह्या बिन याह्या] हमसे [अबू खैत्सामा] [अबू इशाक] से कहिन हैं, उ कहिन; हम [अल असवाद बिन यजीद] से सब कुछ पूछेन जवन ['ऐस्याह] हमसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रात के नमाज के बारे मा बताइन। ऊ कहत है; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात के शुरुआत मा सोवत रहें, अऊर उ चालू होइ जात रहें - उ गतिविधियन करत रहें - रात के अंत मा, अगर उनके पास अपनी पत्नी के लिए कौनो इच्छा रही, तौ उ आपन इच्छा करत रहें, फिर उ सोवत रहें। अगर पहिली अज़ान कीन जात, त ऐसिया जारी रखिन; ऊ तुरंत भागि गा'। अल्लाह के कसम ऐसिया ने 'खड़े होकर' नहीं कहा, जिसके बाद उन्होंने पानी डाला। अल्लाह के कसम ऐसियाह संपादक के रूप मा 'मंडी' का जिक्र नाहीं किहिन। और मैं जानत हौं कि तुम का चाहत हौ, अगर ऊ जुनुब नाहीं है, तौ ऊ वजू करत है, जइसे कि एक मनई नमाज के लिए वजू करत है, फिर ऊ दुइ रकात पढ़त है।