Shalat zhuhur bersama beliau di madinah empat raka'at di dzul hulaifah dua raka'at
Imam Muslim : 1115
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُنْكَدِرِ وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ مَيْسَرَةَ سَمِعَا أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُا صَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الظُّهْرَ بِالْمَدِينَةِ أَرْبَعًا وَصَلَّيْتُ مَعَهُ الْعَصْرَ بِذِي الْحُلَيْفَةِ رَكْعَتَيْنِ
हमसे कहिन [सैद बिन मंसूर] हमसे कहिन हैं [सुफयान] हमसे कहिन हैं [मुहम्मद बिन अल मुनकादिर] अऊर [इब्राहिम बिन मैसरह] दुइनौ [अनस बिन मलिक] का कहत सुने हैं; 'मैं एक बार मदीना मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे चार रकात के लिए दोपहर के नमाज पढ़े रहेन, अऊर हमने उनके साथ दज़ुल हुलैफा मा दुइ रकात के लिए असर नमाज भी पढ़े रहेन'।