Imam Muslim : 249
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا لَيْثٌ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَمَّا كَذَّبَتْنِي قُرَيْشٌ قُمْتُ فِي الْحِجْرِ فَجَلَا اللَّهُ لِي بَيْتَ الْمَقْدِسِ فَطَفِقْتُ أُخْبِرُهُمْ عَنْ آيَاتِهِ وَأَنَا أَنْظُرُ إِلَيْهِ
हमसे [कुतैबा बिन सैद] हमसे [लैट्स] से [उकैल] से [अज़-जुहरी] से [इब्न सलामा बिन अब्दुर्रहमान] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से रिवायित किहिन हैं, उ कहिन, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जब कुरैश ने मुझसे झूठ बोला, त हिजीर में खड़ा रहा। फिर अल्लाह ने मोका बैतुल मकदीस देखावा। फिर मैं ओनका अल्लाह के महानता के निशानी के बारे मा बतावै लाग। वहि समय हम बैतुल मकदीस के ओर देखेन।