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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Turunnya QS. Ad Dukhan: 10-16 setelah Nabi mendoakan kemarau seperti zaman Yusuf atas kaum Quraisy yang membangkang, hingga mereka melihat langit seperti berkabut karena kelaparan

Imam Bukhari : 4435

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي الضُّحَى عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَ دَخَلْنَا عَلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَيَا أَيُّهَا النَّاسُ مَنْ عَلِمَ شَيْئًا فَلْيَقُلْ بِهِ وَمَنْ لَمْ يَعْلَمْ فَلْيَقُلْ اللَّهُ أَعْلَمُ فَإِنَّ مِنْ الْعِلْمِ أَنْ يَقُولَ لِمَا لَا يَعْلَمُ اللَّهُ أَعْلَمُ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِنَبِيِّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ{ قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ وَمَا أَنَا مِنْ الْمُتَكَلِّفِينَ }وَسَأُحَدِّثُكُمْ عَنْ الدُّخَانِ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعَا قُرَيْشًا إِلَى الْإِسْلَامِ فَأَبْطَئُوا عَلَيْهِ فَقَالَ اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَيْهِمْ بِسَبْعٍ كَسَبْعِ يُوسُفَ فَأَخَذَتْهُمْ سَنَةٌ فَحَصَّتْ كُلَّ شَيْءٍ حَتَّى أَكَلُوا الْمَيْتَةَ وَالْجُلُودَ حَتَّى جَعَلَ الرَّجُلُ يَرَى بَيْنَهُ وَبَيْنَ السَّمَاءِ دُخَانًا مِنْ الْجُوعِ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ{ فَارْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِي السَّمَاءُ بِدُخَانٍ مُبِينٍ يَغْشَى النَّاسَ هَذَا عَذَابٌ أَلِيمٌ }قَالَ فَدَعَوْا{ رَبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ أَنَّى لَهُمْ الذِّكْرَى وَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مُبِينٌ ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَجْنُونٌ إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا إِنَّكُمْ عَائِدُونَ }أَفَيُكْشَفُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ فَكُشِفَ ثُمَّ عَادُوا فِي كُفْرِهِمْ فَأَخَذَهُمْ اللَّهُ يَوْمَ بَدْرٍ قَالَ اللَّهُ تَعَالَى{ يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَى إِنَّا مُنْتَقِمُونَ }

हमसे कहिस है [कुतैबा बिन सैद] हमसे [जरीर] से [अल अमासी] से [अबू दलुहा] से [मसरूक] कहिस है; जब हम [अब्दुल्लाह बिन मसूद] से मिलेन, तौ उ कहिन; जेके कुछु जानै ऊ कहै जो जानै ॥ और जिसको न जाने तो कहे कि अल्लाह जादा जाने काहे से कि ई ज्ञान का हिस्सा है जब ऊ ईका नाहीं जानत है, ऊ कहत है; 'अल्लाह सबसे अच्छा जानत है'। अल्लाह अज्जा व जल्ला ने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा: कहौ - हे मुहम्मद-: 'मैं आपसे अपने दाव के लिए कौनो इनाम नाहीं मांगत हउँ अऊर मैं ओन लोगन में से नाहीं हउँ जे चीजन का बनावत हैं। -शाद: 86-। अऊर मैं तोहका धुंध के बारे मा बताउब, दरअसल अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुरैश लोगन का इस्लाम अपनावै का आह्वान किहिन, लेकिन ओका स्वीकार करै का टाल दिहिन। त पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने प्रार्थना की: हे अल्लाह, यूसुफ के सात साल के तरह सात साल के अकाल भेज के ओनके सामना करै मा मोर मदद करौ। यहिसे उइ सालन के अकाल से हमला किहिन जब तक कि उइ लाश अऊर चमड़ी नाहीं खा लिहिन। एक जने देखिन कि भूख के मारे उनके अउर आसमान के बीच मा कोहरा है। अल्लाह अज्जा वा जल्ला ने कहा: तो उ दिन का इंतजार करा जब आसमान एक असली धुंध लाए जवन मनुष्यन का ढँक ले। ई एक दर्दनाक सजा है। -अद दुखन: १०-११-। अब्दुल्ला कहिन; यहिसे उइ प्रार्थना किहिन: 'हमरे प्रभु, हमसे ई यातना दूर करा। सचमुच, हम विश्वास करब'। उइ चेतावनी का कैसे स्वीकार कर सकत रहें, जब उनके पास एक दूत आवा रहा जे स्पष्टीकरण दिहिस रहा, तब उइ ओसे मुँह फेर लिहिन अऊर कहिन: 'उ एक अइसन मनई है जउन दूसर लोगन से शिक्षा स्वीकार करत है अऊर एक पागल भी है। सचमुच -अगर- हम थोड़े से यातना का खतम करब, सचमुच तुम लौटब -नकार-। -अद दुखन: 12-15-। का इनकी सजा कायामत के दिन बंद होई? इब्न मसूद ने कहा; तौ सजा बंद होइगै, मुला वै अविश्वास मा लौटि आइन। जब तक कि अल्लाह बदर के लड़ाई मा ओनका नाश नाहीं किहिन जइसे कि उ कहिन: '-याद रखौ- उ दिन-जब- हम ओनका भारी प्रहार से मारे रहेन। सचमुच, हम प्रतिशोध देवे वाले हैं'। -अद दुखन: १६-।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 3431, 3895, 3989
Imam Bukhari : 952, 4325, 4401, 4435, 4448, 4449, 4450
Imam Muslim : 5006, 5007
Imam Tirmidzi : 3177