Turunnya tambahan lafazh "ghairu ulidh-dharar" pada QS. An-Nisa': 95 setelah Ibnu Ummi Maktum mengadukan kebutaannya
Imam Bukhari : 4227
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ الْبَرَاءِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَلَمَّا نَزَلَتْ{ لَا يَسْتَوِي الْقَاعِدُونَ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ }دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ زَيْدًا فَكَتَبَهَا فَجَاءَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ فَشَكَا ضَرَارَتَهُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ غَيْرَ أُولِي الضَّرَرِ }
हमसे कहिन है [हफश बिन उमर] हमसे [स्युबाह] से [अबू इशाक] से [अल बार' रदलियाअल्लाहु अनहू] कहिन हैं; जब आयत प्रकट भै: LAA YASTAWIL QAA'IDUUNA MINAL MUKMINIINA WAL MUJAHIDUUNA FII SBIILILLAAH' 'लड़े न करै वाले अऊर जेहाद लड़ै वालेन के बीच कोई बराबरी नाहीं होत है'। -अन निसा: ९५- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जैद को बोलाया, फिर जैद ने लिखा। तब उम्मी मकतुम युद्ध मा शामिल होय मा कठिनाई के बारे मा शिकायत करै आईं काहे से कि उ अंधी रहीं। तो अल्लाह ने यह आयत प्रकट की : GHAIRU ULIDLARAR' 'सिवाय उनको जिनके पास बाधा है'।