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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Tata cara shalat kusuf (gerhana matahari) shalat gerhana dan penjelasan tentang gerhana

Imam Nasa'i : 1465

أَخْبَرَنَا هِلَالُ بْنُ بِشْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ الصَّمَدِ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي السَّائِبُ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرٍو حَدَّثَهُ قَالَ انْكَسَفَتْ الشَّمْسُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الصَّلَاةِ وَقَامَ الَّذِينَ مَعَهُ فَقَامَ قِيَامًا فَأَطَالَ الْقِيَامَ ثُمَّ رَكَعَ فَأَطَالَ الرُّكُوعَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ وَسَجَدَ فَأَطَالَ السُّجُودَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ وَجَلَسَ فَأَطَالَ الْجُلُوسَ ثُمَّ سَجَدَ فَأَطَالَ السُّجُودَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ وَقَامَ فَصَنَعَ فِي الرَّكْعَةِ الثَّانِيَةِ مِثْلَ مَا صَنَعَ فِي الرَّكْعَةِ الْأُولَى مِنْ الْقِيَامِ وَالرُّكُوعِ وَالسُّجُودِ وَالْجُلُوسِ فَجَعَلَ يَنْفُخُ فِي آخِرِ سُجُودِهِ مِنْ الرَّكْعَةِ الثَّانِيَةِ وَيَبْكِي وَيَقُولُ لَمْ تَعِدْنِي هَذَا وَأَنَا فِيهِمْ لَمْ تَعِدْنِي هَذَا وَنَحْنُ نَسْتَغْفِرُكَ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ وَانْجَلَتْ الشَّمْسُ فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَطَبَ النَّاسَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ آيَتَانِ مِنْ آيَاتِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَإِذَا رَأَيْتُمْ كُسُوفَ أَحَدِهِمَا فَاسْعَوْا إِلَى ذِكْرِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ لَقَدْ أُدْنِيَتْ الْجَنَّةُ مِنِّي حَتَّى لَوْ بَسَطْتُ يَدِي لَتَعَاطَيْتُ مِنْ قُطُوفِهَا وَلَقَدْ أُدْنِيَتْ النَّارُ مِنِّي حَتَّى لَقَدْ جَعَلْتُ أَتَّقِيهَا خَشْيَةَ أَنْ تَغْشَاكُمْ حَتَّى رَأَيْتُ فِيهَا امْرَأَةً مِنْ حِمْيَرَ تُعَذَّبُ فِي هِرَّةٍ رَبَطَتْهَا فَلَمْ تَدَعْهَا تَأْكُلُ مِنْ خَشَاشِ الْأَرْضِ فَلَا هِيَ أَطْعَمَتْهَا وَلَا هِيَ سَقَتْهَا حَتَّى مَاتَتْ فَلَقَدْ رَأَيْتُهَا تَنْهَشُهَا إِذَا أَقْبَلَتْ وَإِذَا وَلَّتْ تَنْهَشُ أَلْيَتَهَا وَحَتَّى رَأَيْتُ فِيهَا صَاحِبَ السِّبْتِيَّتَيْنِ أَخَا بَنِي الدَّعْدَاعِ يُدْفَعُ بِعَصًا ذَاتِ شُعْبَتَيْنِ فِي النَّارِ وَحَتَّى رَأَيْتُ فِيهَا صَاحِبَ الْمِحْجَنِ الَّذِي كَانَ يَسْرِقُ الْحَاجَّ بِمِحْجَنِهِ مُتَّكِئًا عَلَى مِحْجَنِهِ فِي النَّارِ يَقُولُ أَنَا سَارِقُ الْمِحْجَنِ

हमका [हिलाल बिन बिसिर] सूचित कइके उ कहिन; हमका ['अब्दुल अजीज बिन 'अब्दुल शमाद] ['अथा बिन अस सायब] से बताइस है, उ कहिन; हमसे [अबू अस-सैब] कहिन कि ['अब्दुल्लाह बिन अमरू] ने उनसे कहा, उ कहिन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय सूर्य ग्रहण रहा, यहै कारन उ नमाज पढ़ै खातिर खड़ा होइगा अऊर लोग उनके साथ नमाज पढ़िन। पैगम्बर बहुत देर तक खड़े रहे, फिर प्रणाम किहिन, एक लंबा प्रणाम के साथ। फिर मुड़ी उठाय कै लंबी सजदा करि सजदा किहिन, फिर माथा उठाय कै लंबी बैठि कै बैठि गये। तब लंबी सजदा करिके पुनः सिजदा किहिन, औ सिर उठाय खड़ा होइ गयेन। दूसर रकात मा खड़ा होय, प्रणाम करै, सजदा करै अऊर बैठै मा उहै किहिन जवन पहिले रकात मा किहिन। उ दूसर रकात के दौरान अपने सजदा के अंत मा फूंक दिहिस अऊर रोइस। यहिके बाद उ कहिन: 'जब हम ओनके बीच रहेन तब तक ई नाहीं भवा रहा! ई नाहीं भवा अऊर हम अबहियों आपसे माफी मांगित है'। तब ऊ आपन माथा उठाइस, जब तक सूरज तेज रहा। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब उठिन अऊर लोगन का ओनके तारीफ करत प्रचार किहिन। फिर उ कहिन: 'अल्लाह अज्जा वा जल्ला के महानता के निशानी मा सूर्य अऊर चाँद दुई निशानी हैं। इनमें से कोई भी ग्रहण देखे तो तुरंत अल्लाह अज्जा वा जल्ला का ज़िकर कराये जेकरे हाथन मा मुहम्मद के आत्मा है, स्वर्ग का सचमुच मोर पास लाया गा है, ताकि अगर मैं आपन हाथ बढ़ाऊँ तौ मैं निश्चित रूप से वहिसे कुछ तक पहुँच सकौं। सचमुच, नरक का मोर पास तब तक लाया गा है जब तक कि मैं तोहका ओसे बचावै के लिए एक ढाल नाहीं बनावत हउ काहे से कि तोहका डर है कि नरक तोहरे ऊपर आ जाई जब तक कि मैं हिमयार के एक औरत का एक बिल्ली के कारण यातना देत नाहीं देखेंव, जेका उ बाँधे रही, बिना ओका धरती के कीड़न से अपने लिए भोजन खोजै दिए। जब तक उ मर नाहीं गवा तब तक ओका खाना अऊर पीना नाहीं दिहिस। हम देखेन कि बिल्ली ओका काटत है अगर ऊ आगे मुँह करत है, अऊर अगर ऊ मुँह फेरत है तौ बिल्ली ओकर बट का काटत है। हम एक अइसन मनई का भी देखेन जेकरे पास बानी दु'दु' के सिबतिया भाइयन से दुइ चप्पल रहे - जेका नरक मा कांटा वाली छड़ी से धकेल दीन गा रहा। हमने भी देखा शाहिब मिहजान - लाठी के मालिक -- तीर्थयात्रियों से लाठी चुराते थे - नरक में अपनी लाठी फेंकते थे, कहते थे ; 'मैं लाठी चोर हौं''।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 2576, 3202, 6195, 14487, 25752
Imam Bukhari : 4798
Imam Muslim : 1508, 1512
Imam Nasa'i : 1455, 1465, 1476
Imam Malik : 399