Imam Tirmidzi : 3551
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ هِلَالٍ الصَّوَّافُ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ الضُّبَعِيُّ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ لَمَّا كَانَ الْيَوْمُ الَّذِي دَخَلَ فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةَ أَضَاءَ مِنْهَا كُلُّ شَيْءٍ فَلَمَّا كَانَ الْيَوْمُ الَّذِي مَاتَ فِيهِ أَظْلَمَ مِنْهَا كُلُّ شَيْءٍ وَلَمَّا نَفَضْنَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْأَيْدِي وَإِنَّا لَفِي دَفْنِهِ حَتَّى أَنْكَرْنَا قُلُوبَنَا قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ
हमसे कहिन [बिसिर बिन हिलाल ऐश शौवफ अल बशरी] हमसे [जफर बिन सुलेमान अदल डलुबाई] से [तसाबित] से [अनस बिन मलिक] कहिन हैं; 'जब दिन पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना शहर में घुसे तो सब कुछ चमका लेकिन जिस दिन पैगम्बर शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम मरे तो सब अंधेरा हो गया और जब हम अपने हाथों से उस पर धूल और गंदगी हटाने के लिए उनके दफन स्थान पर रहे तो मानो हमार दिल अल्लाह के रसूल के मौत से इनकार कर रहा है'। अबू ईसा कहिन; 'यह हदीस गरीब शाहीह के स्तर में है'।