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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Tirmidzi : 3131

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا دَاوُدُ بْنُ الزِّبْرِقَانِ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ لَوْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَاتِمًا شَيْئًا مِنْ الْوَحْيِ لَكَتَمَ هَذِهِ الْآيَةَ { وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِي أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِ } يَعْنِي بِالْإِسْلَامِ { وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ } يَعْنِي بِالْعِتْقِ فَأَعْتَقْتَهُ { أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَاتَّقِ اللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا اللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى النَّاسَ وَاللَّهُ أَحَقُّ أَنْ تَخْشَاهُ إِلَى قَوْلِهِ وَكَانَ أَمْرُ اللَّهِ مَفْعُولًا } وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمَّا تَزَوَّجَهَا قَالُوا تَزَوَّجَ حَلِيلَةَ ابْنِهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى { مَا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِنْ رِجَالِكُمْ وَلَكِنْ رَسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ } وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَبَنَّاهُ وَهُوَ صَغِيرٌ فَلَبِثَ حَتَّى صَارَ رَجُلًا يُقَالُ لَهُ زَيْدُ بْنُ مُحَمَّدٍ فَأَنْزَلَ اللَّهُ { ادْعُوهُمْ لِآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ فَإِنْ لَمْ تَعْلَمُوا آبَاءَهُمْ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ وَمَوَالِيكُمْ } فُلَانٌ مَوْلَى فُلَانٍ وَفُلَانٌ أَخُو فُلَانٍ { هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ } يَعْنِي أَعْدَلُ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ قَدْ رُوِيَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ لَوْ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَاتِمًا شَيْئًا مِنْ الْوَحْيِ لَكَتَمَ هَذِهِ الْآيَةَ { وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِي أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ } هَذَا الْحَرْفُ لَمْ يُرْوَ بِطُولِهِ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَضَّاحٍ الْكُوفِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ

हमसे कहिन है [अली बिन हुज्र] हमसे [दाऊद बिन अबू हिंद] से [अश स्याबी] से [ऐस्या] से रिपोर्ट किहिन हैं [अश स्याबी] से [ऐस्याह] रादलियाहु 'अन्हा ने कहा: अगर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक रहस्योद्घाटन छुपाते, तो उ ई ब्रह्मांड का छुपा देत - जब आप कहते हैं- व्यक्ति जेकरे ऊपर अल्लाह ओनके ऊपर एहसान किहिन है' अर्थात् इस्लाम के साथ 'अऊर आप - भी - ओनके एहसान दिहिन हैं', यानी, जाने देके अऊर फिर जाने से 'अपनी पत्नी का पकड़े रहौ अऊर अल्लाह से डरौ, जब तक कि आप अपने दिल मा छुपावत रहौ कि अल्लाह का प्रकट करिहैं, अऊर आप लोगन से डरत हौ, जबकि अल्लाह उहै है जेकरे पास तोहरे लिए डर का अधिक अधिकार है' जब तक कि अल्लाह नाहीं कहत है' फरमान जारी करब कि ई पूरा होइ'। -अल अहजाब: 37- जब उ उनसे शादी किहिन -ज़ैनब, जैद के पूर्व पत्नी, पेंट।- उइ कहिन: उ अपने बेटवा के पत्नी से शादी किहिन। फिर अल्लाह तआला ने प्रकट किया: 'मुहम्मद आपके बीच से कभी भी एक आदमी का पिता नहीं रहा, बल्कि उ अल्लाह के रसूल अऊर नबियन के मोहर रहा'। -अल अहजाब: 40- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जब उ छोट रहा तब ओका गोद लिहिस। जब तक उ बड़ा नाहीं भवा तब तक उ उनके साथे रहे, उनका जैद बिन मुहम्मद कहा जात रहा, फिर अल्लाह ने -आयत- का प्रकट किहिन: 'उनका -गोद लिए गए बच्चन का- उनके पिता के नाम से -उपयोग- कहिके- कहौ; ई अल्लाह के नजर मा निष्पक्ष है, अऊर अगर तुम ओनके पिता का नाहीं जानत हौ, तौ -उनका धर्म मा आपन भाई अऊर आपन मौला' -अल अहजाब: 5- फलाना अऊर फलाना अऊर फलाना अऊर फलाना अऊर फलाना अऊर फलाना अऊर फलाना, भाई अऊर फलाना अऊर फलाना, ई अल्लाह के नजर मा अधिक न्यायपूर्ण है'। अबू ईसा ने कहा: यह हदीस गरीब है। ई हदीस [दाऊद बिन अबू हिंद] से [अश स्याबी] से [मसरूक] से [ऐसिया] से भी सुनाई गै रही: अगर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक रहस्योद्घाटन छुपावतिन, तौ उ ई आयत छुपावतिन: 'अऊर -याद रखौ-, जब तुम केहू से कहत हौ कि अल्लाह ओनके ऊपर वरदान दिहिस है अऊर तोहका वरदान दिहिस है- ओनके ऊपर'। -अल अहजाब: 37- लेकिन उ पूरा तरह से नाहीं सुनाइन। हमका बतावा गा है कि [अब्दुल्लाह बिन वदल्लाह अल कुफी] हमका [अब्दुल्लाह बिन इदरीस] [दाऊद बिन अबू हिंद] से बताइन हैं।