Imam Tirmidzi : 2956
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي رِزْمَةَ عَنْ إِسْرَائِيلَ عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَرَّ رَجُلٌ مِنْ بَنِي سُلَيْمٍ عَلَى نَفَرٍ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَعَهُ غَنَمٌ لَهُ فَسَلَّمَ عَلَيْهِمْ قَالُوا مَا سَلَّمَ عَلَيْكُمْ إِلَّا لِيَتَعَوَّذَ مِنْكُمْ فَقَامُوا فَقَتَلُوهُ وَأَخَذُوا غَنَمَهُ فَأَتَوْا بِهَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا ضَرَبْتُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَتَبَيَّنُوا وَلَا تَقُولُوا لِمَنْ أَلْقَى إِلَيْكُمْ السَّلَامَ لَسْتَ مُؤْمِنًا } قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَفِي الْبَاب عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ
हमसे ['अब्द बिन हुमैद] हमसे [अब्दुल अजीज बिन अबू रिमजाह] से [इजरायल] से [सिमक बिन हरब] से [इकरिमा] से [इब्न अब्बास] से कहिन है, उ कहिन; 'बनी सुलेम का एक व्यक्ति अपनी बकरी ले जाते हुए रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के कई साथियों के पास से गुजरा, फिर उ व्यक्ति ने उनका अभिवादन किया, लेकिन उन्होंने जवाब दिया; 'वह तोहका नमस्कार नाहीं करत है, लेकिन तोहसे शरण लेय चाहत है'। फिर खड़ा होइके ओका मारिन अऊर ओकर बकरी लइ लिहिन। उसके बाद उन्हें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास ले गए, फिर आयत उतरी; हे इमानदार लोग, जब तुम अल्लाह के रास्ते मा - लड़ै - जात हौ, तौ सावधान रहौ अऊर आपसे 'सलाम' कहै वाले से मत कहौ: 'तुम इमानी नाहीं हौ। QS अन-निसा`: 94. अबू ईसा ने कहा; ई हदीस हसन है। यहि मामला मा, उसामाह बिन जैद से एक समान हदीस है।