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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Tirmidzi : 2419

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ لَيْثٍ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى يَا عِبَادِي كُلُّكُمْ ضَالٌّ إِلَّا مَنْ هَدَيْتُهُ فَسَلُونِي الْهُدَى أَهْدِكُمْ وَكُلُّكُمْ فَقِيرٌ إِلَّا مَنْ أَغْنَيْتُ فَسَلُونِي أَرْزُقْكُمْ وَكُلُّكُمْ مُذْنِبٌ إِلَّا مَنْ عَافَيْتُ فَمَنْ عَلِمَ مِنْكُمْ أَنِّي ذُو قُدْرَةٍ عَلَى الْمَغْفِرَةِ فَاسْتَغْفَرَنِي غَفَرْتُ لَهُ وَلَا أُبَالِي وَلَوْ أَنَّ أَوَّلَكُمْ وَآخِرَكُمْ وَحَيَّكُمْ وَمَيِّتَكُمْ وَرَطْبَكُمْ وَيَابِسَكُمْ اجْتَمَعُوا عَلَى أَتْقَى قَلْبِ عَبْدٍ مِنْ عِبَادِي مَا زَادَ ذَلِك فِي مُلْكِي جَنَاحَ بَعُوضَةٍ وَلَوْ أَنَّ أَوَّلَكُمْ وَآخِرَكُمْ وَحَيَّكُمْ وَمَيِّتَكُمْ وَرَطْبَكُمْ وَيَابِسَكُمْ اجْتَمَعُوا عَلَى أَشْقَى قَلْبِ عَبْدٍ مِنْ عِبَادِي مَا نَقَصَ ذَلِكَ مِنْ مُلْكِي جَنَاحَ بَعُوضَةٍ وَلَوْ أَنَّ أَوَّلَكُمْ وَآخِرَكُمْ وَحَيَّكُمْ وَمَيِّتَكُمْ وَرَطْبَكُمْ وَيَابِسَكُمْ اجْتَمَعُوا فِي صَعِيدٍ وَاحِدٍ فَسَأَلَ كُلُّ إِنْسَانٍ مِنْكُمْ مَا بَلَغَتْ أُمْنِيَّتُهُ فَأَعْطَيْتُ كُلَّ سَائِلٍ مِنْكُمْ مَا سَأَلَ مَا نَقَصَ ذَلِكَ مِنْ مُلْكِي إِلَّا كَمَا لَوْ أَنَّ أَحَدَكُمْ مَرَّ بِالْبَحْرِ فَغَمَسَ فِيهِ إِبْرَةً ثُمَّ رَفَعَهَا إِلَيْهِ ذَلِكَ بِأَنِّي جَوَادٌ مَاجِدٌ أَفْعَلُ مَا أُرِيدُ عَطَائِي كَلَامٌ وَعَذَابِي كَلَامٌ إِنَّمَا أَمْرِي لِشَيْءٍ إِذَا أَرَدْتُهُ أَنْ أَقُولَ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَرَوَى بَعْضُهُمْ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ مَعْدِي كَرِبَ عَنْ أَبِي ذَرٍّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ

हमसे कहिस है [हनद] हमसे कहिस है [अबू अल अहवाह] से [लैट्स] से [स्याहर बिन हौस्याब] से [अब्दुर्रहमान बिन घनम] से [अबू ज़ार] कहिन: रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह ताअला ने कहा: हे मेरे सेवक, तुम सब हार गए हो सिवाय उनको, मैं तुमसे मार्गदर्शन माँगूंगा, और मैं तुमसे मार्गदर्शन माँगूंगा आपका मार्गदर्शन करा, आप सब गरीबन का सिवाय जवन हम प्रदान करत हई, हमसे माफी माँगौ अऊर हम आपका रोजी-रोटी निश्चित रूप से देब, आप सब पापी हईं सिवाय ओनके जेका हम माफ करत हई, आप सब मा से जे भी जानत है कि हमरे पास माफ करै के क्षमता है, हमसे माफी माँगौ, हम निश्चित रूप से माफ करब अऊर हमका परवाह नाहीं है, अगर आप, जीवित अऊर मृतक अऊर मृतक के पहिला अऊर आखिरी मोर सबसे भक्त सेवक के दिल के ऊपर इकट्ठा होइ जा, ई मोर शक्ति का एक पंख के आकार से भी नाहीं बढ़ा देई। मच्छर, अगर आपके पहिले अऊर आखिरी लोग, जिंदा अऊर मृतक, गीला अऊर सूखा मोर सबसे भ्रष्ट सेवकन में से एक के दिल पर इकट्ठा होत हैं -ब्रेंगसेक-, तौ ई मोर शक्ति का जरा भी कम नाहीं करत है भले ही उ केवल एक मच्छर के पंख के आकार का हो, अगर आपके पहिला अऊर आखिरी लोग, जीवित अऊर मृतक, पश्चिमी अऊर पश्चिमी अऊर भूमि के एक बड़ा टुकड़ा पर इकट्ठा होत हैं उतना मांगत है जेतना उ चाहत है तब मैं हर एक का देत हउँ जे पूछत है, जवन मोर शक्ति का कम नाहीं करत है सिवाय यहिके कि तुममें से एक समुद्र पार करत है फिर एक सुई डुबोवत है अऊर फिर ओका उठावत है, ई एहसे है काहे से कि मैं सबसे सम्मानित अऊर प्रशंसनीय हउँ, मैं जइसे चाहत हउँ वइसे करत हउँ, मोर वरदान कलाम है अऊर मोर सजा कलाम है, वास्तव मा, अगर मैं कुछ चाहत हउँ, तौ ई होइ: अबू ईसा ने कहा: यह हदीस हसन है। लागत है कि ओनमा से कुछ लोग [स्याहर बिन हुशियाब] से [मा'दी करीब] से [अबू ज़ार] से पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ई हदीस सुनाइन।