Imam Darimi : 2840
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ عَنْ النُّعْمَانِ عَنْ مَكْحُولٍ أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ مِيرَاثِ وَلَدِ الْمُلَاعَنَةِ لِمَنْ هُوَ قَالَ جَعَلَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِأُمِّهِ فِي سَبَبِهِ لِمَا لَقِيَتْ مِنْ الْبَلَاءِ وَلِإِخْوَتِهِ مِنْ أُمِّهِ و قَالَ مَكْحُولٌ فَإِنْ مَاتَتْ الْأُمُّ وَتَرَكَتْ ابْنَهَا ثُمَّ تُوُفِّيَ ابْنُهَا الَّذِي جُعِلَ لَهَا كَانَ مِيرَاثُهُ لِإِخْوَتِهِ مِنْ أُمِّهِ كُلُّهُ لِأَنَّهُ كَانَ لِأُمِّهِمْ وَجَدِّهِمْ وَكَانَ لِأَبِيهَا السُّدُسُ مِنْ ابْنِ ابْنَتِهِ وَلَيْسَ يَرِثُ الْجَدُّ إِلَّا فِي هَذِهِ الْمَنْزِلَةِ لِأَنَّهُ إِنَّمَا هُوَ أَبُ الْأُمِّ وَإِنَّمَا وَرِثَ الْإِخْوَةُ مِنْ الْأُمِّ أُمَّهُمْ وَوَرِثَ الْجَدُّ ابْنَتَهُ لِأَنَّهُ جُعِلَ لَهَا فَالْمَالُ الَّذِي لِلْوَلَدِ لِوَرَثَةِ الْأُمِّ وَهُوَ يُحْرِزُهُ الْجَدُّ وَحْدَهُ إِذَا لَمْ يَكُنْ غَيْرُهُ
हमका ई बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अल मुबारक] हमका [यह्या बिन हमजाह] से [अन नुमान] से [मखुल] से कहिन है कि उनसे एक बार लियान करै वाली औरत के बच्चा के विरासत के बारे मा पूछा गा रहा, संपत्ति केकर है? उ जवाब दिहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने -विरासत- अपनी माँ को दी, काहे से कि उ -माता- परीक्षा सहन किहिन, अऊर अपने भाइयन का माँ से। मखुल कहिन; अगर मां मर जाय और बेटा छोड़ जाय। फिर उ बच्चा जेकरे महतारी का विरासत मिली है, उ मर जात है, तौ सब विरासत ओकरे भाई-बहनन के पास जात है काहे से कि विरासत ओनके महतारी अऊर ओनके दादा के पास जाय का चाही, अऊर ओकरे पिता के लिए, महतारी - दादा - का ओकरे बिटिया से अपने पोता के विरासत का छठा हिस्सा मिलत है, अऊर एक मातृ दादा का ई अपवाद मा विरासत नाहीं मिलत है काहे से कि ऊ ई पद मा विरासत नाहीं पावत है। माई के तरफ से पिता है। अऊर भाई-बहनन का विरासत मिलै का कारन ओनके महतारी के कारण है। दरअसल, महतारी के भाई केवल अपनी महतारी का विरासत पावत हैं, अऊर दादा केवल अपनी बिटियन का विरासत देत हैं काहे से कि संपत्ति ओनके लिए है। जहाँ तक महतारी के विरासत के हिस्सा के रूप मा बच्चा के संपत्ति के बात है, तौ ई दादा का अकेले पावै से रोकत है।