Imam Darimi : 2844
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا أَبُو هَانِئٍ قَالَ سُئِلَ عَامِرٌ عَنْ مَوْلُودٍ وُلِدَ وَلَيْسَ بِذَكَرٍ وَلَا أُنْثَى لَيْسَ لَهُ مَا لِلذَّكَرِ وَلَيْسَ لَهُ مَا لِلْأُنْثَى يُخْرِجُ مِنْ سُرَّتِهِ كَهَيْئَةِ الْبَوْلِ وَالْغَائِطِ سُئِلَ عَنْ مِيرَاثِهِ فَقَالَ نِصْفُ حَظِّ الذَّكَرِ وَنِصْفُ حَظِّ الْأُنْثَى
हमसे कहिन है [अबू नुआइम] हमसे कहिन हैं [अबू हानी`] उ कहिन; [अमीर] से एक बार एक बच्चा के विरासत के बारे मा पूछा गा रहा जवन पुरुष जननांग अऊर मादा जननांग के बिना पैदा भवा रहा, जबकि ओकरे नाभि से कुछ पेशाब अऊर मल जइसन निकला रहा। त उ जवाब दिहिस; -विरासत का हिस्सा है- आधा पुरुष का हिस्सा और आधा स्त्री का हिस्सा।