Imam Darimi : 2227
أَخْبَرَنَا سَهْلُ بْنُ حَمَّادٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي بِشْرٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ امْرَأَةً نَذَرَتْ أَنْ تَحُجَّ فَمَاتَتْ فَجَاءَ أَخُوهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَوْ كَانَ عَلَيْهَا دَيْنٌ كُنْتَ قَاضِيَهُ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَاقْضُوا اللَّهَ فَاللَّهُ أَحَقُّ بِالْوَفَاءِ
हमका ई बतावा गा है कि [सहल बिन हम्माद] हमका [स्यू'बाह] से [अबू बिसिर] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] से कहिन है कि एक औरत हज करै के कसम खाइस, लेकिन जाहिर तौर पर उ मर गें - हज करै से पहिले -, फिर ओकर भाई रसूलुल्लाह सल्लाह अलैह के पास आवा अऊर वल्लाह से ई बारे मा पूछिस: तोहार भाई के पास कर्ज रहा, का तुम ओका चुका देब?' आदमी जवाब दिहिस; 'हाँ'। उ कहिन: 'अल्लाह से आपन कर्ज चुकावा, काहे से कि उ आपन कर्ज पूरा करै का ज्यादा हकदार है'।