Imam Darimi : 2103
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ عَنْ مَنْصُورِ بْنِ زَاذَانَ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ أَبِي الْعَجْفَاءِ السُّلَمِيِّ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ خَطَبَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ أَلَا لَا تُغَالُوا فِي صُدُقِ النِّسَاءِ فَإِنَّهَا لَوْ كَانَتْ مَكْرُمَةً فِي الدُّنْيَا أَوْ تَقْوَى عِنْدَ اللَّهِ كَانَ أَوْلَاكُمْ بِهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَصْدَقَ امْرَأَةً مِنْ نِسَائِهِ وَلَا أُصْدِقَتْ امْرَأَةٌ مِنْ بَنَاتِهِ فَوْقَ اثْنَتَيْ عَشْرَةَ أُوقِيَّةً أَلَا وَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَيُغَالِي بِصَدَاقِ امْرَأَتِهِ حَتَّى يَبْقَى لَهَا فِي نَفْسِهِ عَدَاوَةٌ حَتَّى يَقُولَ كَلِفْتُ إِلَيْكِ عَلَقَ الْقِرْبَةِ أَوْ عَرَقَ الْقِرْبَةِ
हमका सूचित किहिन है ['अमर बिन 'औन] हमका [हुसैम] से [मंसूर बिन ज़दज़ान] से [इब्न सिरिन] से [अबू अल 'अजफा` अस सुलामी] से सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हम [उमर बिन अल खठब] का प्रचार करत सुने रहेन, उ अल्लाह के स्तुति किहिन, फिर कहिन; 'जान लीजिए कि औरतन के दहेज मा ज्यादती न होय का चाही, अगर ज्यादती दहेज दुनिया मा शान या अल्लाह के नजर मा धर्मपरायणता का रूप है, तौ निश्चित तौर पै ई करै वाला पहिला मनई रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रहा। उ अपनी कौनो पत्नी का दहेज नाहीं दिहिन अऊर न ही उनकी कौनो बिटिया का बारह उकिया से ऊपर दहेज दिहिन। सचमुच तुम में से एक अपनी पत्नी के दहेज में अत्यधिक है, जब तक कि उसमें अपनी पत्नी के प्रति दुश्मनी न रह जाय, जब तक कि वह कहे; 'मैं गेरिबा के रस्सी तक, या गेरिबा के पसीना के तरह पसीना बहावै तक सब कुछ सह चुका हौं'।