Wanita yang ditalak tiga menjalani iddah di rumah selain rumah suaminya, dan Nabi memilihkan rumah yang menjaga kehormatannya
Imam Darimi : 2082
أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ قَيْسٍ أَنَّهَا حَدَّثَتْهُ وَكَتَبَهُ مِنْهَا كِتَابًا أَنَّهَا كَانَتْ تَحْتَ رَجُلٍ مِنْ قُرَيْشٍ مِنْ بَنِي مَخْزُومٍ فَطَلَّقَهَا الْبَتَّةَ فَأَرْسَلَتْ إِلَى أَهْلِهِ تَبْتَغِي مِنْهُمْ النَّفَقَةَ فَقَالُوا لَيْسَ لَكِ نَفَقَةٌ فَبَلَغَ ذَلِكَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَيْسَ لَكِ نَفَقَةٌ وَعَلَيْكِ الْعِدَّةُ وَانْتَقِلِي إِلَى بَيْتِ أُمِّ شَرِيكٍ وَلَا تُفَوِّتِينَا بِنَفْسِكِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ أُمَّ شَرِيكٍ امْرَأَةٌ يَدْخُلُ عَلَيْهَا إِخْوَانُهَا مِنْ الْمُهَاجِرِينَ وَلَكِنْ انْتَقِلِي إِلَى بَيْتِ ابْنِ أُمِّ مَكْتُومٍ فَإِنَّهُ رَجُلٌ أَعْمَى إِنْ وَضَعْتِ ثِيَابَكِ لَمْ يَرَ شَيْئًا وَلَا تُفَوِّتِينَا بِنَفْسِكِ فَانْطَلَقَتْ إِلَى بَيْتِ ابْنِ أُمِّ مَكْتُومٍ فَلَمَّا حَلَّتْ ذَكَرَتْ أَنَّ مُعَاوِيَةَ وَأَبَا جَهْمٍ خَطَبَاهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَّا مُعَاوِيَةُ فَرَجُلٌ لَا مَالَ لَهُ وَأَمَّا أَبُو جَهْمٍ فَلَا يَضَعُ عَصَاهُ عَنْ عَاتِقِهِ فَأَيْنَ أَنْتُمْ مِنْ أُسَامَةَ فَكَأَنَّ أَهْلَهَا كَرِهُوا ذَلِكَ فَقَالَتْ وَاللَّهِ لَا أَنْكِحُ إِلَّا الَّذِي قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَكَحَتْ أُسَامَةَ قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ يَا فَاطِمَةُ اتَّقِي اللَّهَ فَقَدْ عَلِمْتِ فِي أَيِّ شَيْءٍ كَانَ هَذَا قَالَ وَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ قَالَ اللَّهُ تَعَالَى { لَا تُخْرِجُوهُنَّ مِنْ بُيُوتِهِنَّ وَلَا يَخْرُجْنَ إِلَّا أَنْ يَأْتِينَ بِفَاحِشَةٍ مُبَيِّنَةٍ } وَالْفَاحِشَةُ أَنْ تَبْذُوَ عَلَى أَهْلِهَا فَإِذَا فَعَلَتْ ذَلِكَ فَقَدْ حَلَّ لَهُمْ أَنْ يُخْرِجُوهَا
हमसे कहिन है [यजीद बिन हारून] हमसे [मुहम्मद बिन अम्र] [अबू सलामा] से [फातिमा बिन कैस] से कहिन है कि उ ओनसे कहिन; अबू सलामा का एक बार उनसे एक चिट्ठी मिली कि उ पहिले बनी मखज़ूम के एक कुरैश आदमी के पत्नी रहीं, फिर उ तुरंत ओसे तलाक ले लिहिन। तबै फातिमा अपने मनसवा के परिवार वालेन से सहारा मांगै खातिर दूत भेजिस। लेकिन उई कहत हैं; 'तुम अब रोजी रोटी नाहीं कमात हौ'। जब ई बात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक पहुँची, तौ उ कहिन: 'तुम अब रोजी-रोटी नाहीं कमात हौ, अऊर इददा अवधि का इंतजार करै का परी, उम्म शरीक के घरे चले जा, अऊर हमका अनदेखा न करौ ताकि हम तुमका तुमरे बारे मा बता सकित है'। फिर उ कहिन: 'वास्तव मा, उम्म स्यारीक एक अइसन औरत रहीं जेका अक्सर मुहाजिरीन के बीच से उनके भाई आवत रहें, यहिसे उ इब्न उम्मी मकतुम के घर चली गइन। काहे से कि ऊ अंधा मनई है, अगर तुम आपन कपड़ा उतार देब तौ ऊ कुछौ देखाई नाहीं देई। अऊर हमका अनदेखा न करौ ताकि हम आपके बारे मा बता सकित है'। फिर उ इब्न उम्मी मकतुम के घरे गें, जब ओनके इद्दात के अवधि खतम होइ गै, तौ उ उल्लेख किहिन कि मुआविया अऊर अबू जहम ओनसे प्रपोज किहिन हैं। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'मुआविया एक अइसन मनई रहे जेकरे पास कौनो धन नाहीं रहा, जबकि अबू जहम एक अइसन मनई रहे जे आपन डंडा अपने कंधा से नीचे नाहीं रख सकत रहे। उसामा के बारे मा का सोचत हौ?' लेकिन लागत है कि फातिमा के परिवार वालेन का या बात नीक नहीं लागत आय। लेकिन उ कहिन; 'अल्लाह के कसम, मैं उ व्यक्ति के अलावा शादी नाहीं करब जेकरे बारे मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन हैं'। फिर उ उसामा से शादी किहिन। मुहम्मद बिन अमर ने कहा; मुहम्मद बिन इब्राहिम ने कहा -संपादकीय के साथ-; 'हे फातिमा, अल्लाह से डरो। सचमुच आप यहिके बारे मा पहिले से जानत हई'। इब्न अब्बास कहिन; अल्लाह ताआला कहत हैं: जब तक उ स्पष्ट रूप से घृणित काम न करिहैं, तब तक ओनका घर से न निकारौ अऊर ओनका बाहर न जाय देइ। क्यूएस अथ थल्लाक; 1. फैस्या का काम अपने परिवार के साथ कुछ क्रूरता करब है, अगर उ अइसन करत है, तौ ओनके लिए ओका निष्कासित करब जायज है।'