Imam Darimi : 1937
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْقَاسِمِ الْأَسَدِيُّ حَدَّثَنَا ثَوْرٌ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَكَلَ أَوْ شَرِبَ قَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ غَيْرَ مَكْفُورٍ وَلَا مُوَدَّعٍ وَلَا مُسْتَغْنًى عَنْ رَبِّنَا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अल कासिम अल असदी] हमसे [तसौर] [खालिद बिन मदन] से [अबू उमामा] से कहिन हैं, उ कहिन; जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खाना या पीना खतम किहिन, तौ उ कहिन: 'अल हमदुल्लिल्लाही हमदान कटसीइरन थाय्यिबन मुबाराकन फिहि घैरा मकफूरिन वा ला मुवादाइन वा ला मुस तघनान बब्बा'। -अल्लाह के स्तुति हो, स्तुति के साथ जवन बहुतायत अऊर अच्छा हो अऊर ओनके ऊपर आशीर्वाद हो, अगर ई हमरे रब्ब द्वारा इनकार, त्याग अऊर जरूरत न हो-'।