Imam Darimi : 1928
أَخْبَرَنَا أَبُو الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ هِشَامُ بْنُ زَيْدِ بْنِ أَنَسٍ أَخْبَرَنِي قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُ أَنْفَجْنَا أَرْنَبًا وَنَحْنُ بِمَرِّ الظَّهْرَانِ فَسَعَى الْقَوْمُ فَلَغِبُوا فَأَخَذْتُهَا وَجِئْتُ بِهَا إِلَى أَبِي طَلْحَةَ فَذَبَحَهَا وَبَعَثَ بِوَرِكَيْهَا أَوْ فَخِذَيْهَا شَكَّ شُعْبَةُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَبِلَهَا
हमसे कहिन है [अबू अल वालिद] हमसे कहिन है [स्यूबाह] उ कहिन, हमसे कहिन हैं [हिस्याम बिन जैद बिन अनस] उ कहिन; हम [अनास बिन मलिक] का कहत सुने रहेन; 'हम एक बार मररुज झहरान मा एक खरगोश पर घात लगाय के मारे रहेन, फिर लोग ओका पकड़ै के कोशिश किहिन, फिर ओनका थकान महसूस भै। फिर मैं ओका पकड़ै मा कामयाब रहा, अऊर ओका अबू तल्हा के पास लइ आवा, फिर उ ओका वध कइ दिहिस। फिर उ आपन कमर या दुई जांघ भेजिन - स्यूबाह का हदीस के संपादन के बारे मा संदेह रहा - रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पास, उ ओनका स्वीकार किहिन'।