Imam Darimi : 1920
حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ عَنْ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ أَنَّهُ سَمِعَ سُفْيَانَ بْنَ أَبِي زُهَيْرٍ يُحَدِّثُ نَاسًا مَعَهُ عِنْدَ بَابِ الْمَسْجِدِ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ اقْتَنَى كَلْبًا لَا يُغْنِي عَنْهُ زَرْعًا وَلَا ضَرْعًا نَقَصَ مِنْ عَمَلِهِ كُلَّ يَوْمٍ قِيرَاطٌ قَالُوا أَنْتَ سَمِعْتَ هَذَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِي وَرَبِّ هَذَا الْمَسْجِدِ
हमसे कहिन है [अल हाकम बिन अल मुबारक] हमसे [मलिक] [यजीद बिन खुशैफा] से [अस सायब बिन यजीद] से कहिन है कि उ [सुफयान बिन अबू जुहैर] का मस्जिद के दरवाजे पर अपने साथ रहे लोगन से कहत सुने रहे, उ कहिन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'जे कोई कुत्ता रखत है जेकर उपयोग फसलन के रखवाली या - देखभाल - पशुधन के लिए नाहीं कीन जात है, ओकर इनाम हर दिन एक किरथ कम होइ जाई'। उइ पूछत हैं; 'क्या आपने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से यह हदीस सुनी है?' सुफयान जवाब दिहिन; 'हाँ, ई मस्जिद के मालिक रब्ब के द्वारा'।