Imam Darimi : 1918
أَخْبَرَنَا يَعْلَى بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ صَيْدِ الْكَلْبِ فَقَالَ مَا أَمْسَكَ عَلَيْكَ فَكُلْ فَإِنَّ أَخْذَهُ ذَكَاتُهُ وَإِنْ وَجَدْتَ مَعَهُ كَلْبًا فَخَشِيتَ أَنْ يَكُونَ قَدْ أَخَذَهُ مَعَهُ وَقَدْ قَتَلَهُ فَلَا تَأْكُلْهُ فَإِنَّكَ إِنَّمَا ذَكَرْتَ اسْمَ اللَّهِ عَلَى كَلْبِكَ وَلَمْ تَذْكُرْهُ عَلَى غَيْرِهِ أَخْبَرَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ صَيْدِ الْمِعْرَاضِ فَذَكَرَ مِثْلَهُ
हमसे [य'ला बिन उबैद] हमसे [जकरिया] से [अमीर] से ['आदी बिन हातिम] से कहिन है, उ कहिन; हम कुत्तन के शिकार के बारे मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछेन। उन्होंने कहा: 'जो शिकार तुम्हारा कुत्ता पकड़े वह खाओ, क्योंकि पकड़ शर'ई के अनुसार जानवर के लिए वध है, और अगर तुम्हें उसके साथ दूसरा कुत्ता मिल जाय और तुम्हें चिंता है कि दूसरा कुत्ता पकड़कर अपने कुत्ते के साथ शिकार को मार देगा, तो इसे मत खाओ, क्योंकि तुम अपने कुत्ते से केवल अल्लाह का नाम लेते हो और किसी से भी नाम नहीं लेते हो'। हमसे कहिन है [अबू नुआइम] हमसे [जकरिया] से [अमीर] से ['आदी बिन हातिम] से कहिन हैं, उ कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से शिकार के बारे मा पूछेन जेहिका कुंद तरफ तीर से मारा गा रहा - तेज हिस्सा नाहीं -, फिर रावी ने उहै हदीस बताइन।