Imam Darimi : 1912
حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ حَسَّانَ بْنِ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي وَاقِدٍ قَالَ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا بِأَرْضٍ تَكُونُ بِهَا الْمَخْمَصَةُ فَمَا يَحِلُّ لَنَا مِنْ الْمَيْتَةِ قَالَ إِذَا لَمْ تَصْطَبِحُوا وَلَمْ تَغْتَبِقُوا وَلَمْ تَخْتَفِئُوا بَقْلًا فَشَأْنُكُمْ بِهَا قَالَ النَّاسُ يَقُولُونَ بِالْحَاءِ وَهَذَا قَالَ بِالْخَاءِ
हमका [अबू अशिम] से [अल औजाई] से [हसन बिन अथिया] से [अबू वाकिद] से बताय के, उ कहिन; हम पूछित है; 'हे अल्लाह के रसूल, सचमुच हम एक अइसन देश मा हैं जेकर लोग भूख से मरत हैं, का हमरे लिए शव हलाल हैं?' उ कहिन: 'अगर तुम खाना नाहीं बना सकत हौ, दिन के अंत मा नाहीं पी सकत हौ, अऊर सब्जी नाहीं पावत हौ, तौ लाश खाओ'। कथावाचक कहिन; अन्य कथावाचक हा` 'तहताफू' अक्षर से कहत हैं जबकि ई कथावाचक खा` 'तखताफू' से कहत हैं।