Rasulullah shallallahu 'alaihi wasalam jika ingin mendoakan keselamatan kepada seseorang beliau selalu qunut setelah rukuk
Imam Bukhari : 3762
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ السُّلَمِيُّ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ حَدَّثَنِي سَالِمٌ عَنْ أَبِيهِأَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنْ الرُّكُوعِ مِنْ الرَّكْعَةِ الْآخِرَةِ مِنْ الْفَجْرِ يَقُولُ اللَّهُمَّ الْعَنْ فُلَانًا وَفُلَانًا وَفُلَانًا بَعْدَ مَا يَقُولُ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ لَيْسَ لَكَ مِنْ الْأَمْرِ شَيْءٌ إِلَى قَوْلِهِ فَإِنَّهُمْ ظَالِمُونَ }وَعَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ سَمِعْتُ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْعُو عَلَى صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ وَسُهَيْلِ بْنِ عَمْرٍو وَالْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ فَنَزَلَتْ{ لَيْسَ لَكَ مِنْ الْأَمْرِ شَيْءٌ إِلَى قَوْلِهِ فَإِنَّهُمْ ظَالِمُونَ }
हमसे कहिन है [यह्या बिन अब्दुल्लाह जैसा कि सुलामी] हमसे कहिन है [अब्दुल्ला] हमसे कहिन है [मामर] से [अज जुहरी] ने हमका [सलीम] से [अपने पिता] से बतावा है कि उ सुनिन जब रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने फजर नमाज के आखिरी रकात मा प्रणाम करै से आपन सिर उठावा, अल्लाह ने कहा: अऊर यहि तरह,' अर्थात् जब उ कहिन: 'समीअल्लाहु लिमन हमीदा, रब्बाना वलाकल्हमदू'। वहिके बाद अल्लाह ने ई आयत उतारिन: '-तुम ओनके कामन मा जरा भी दखल नाहीं दिहिन -जब तक कि उ कहिन- वाकई, उ लोग अन्यायी लोग हैं-' -प्रश्न। अली इमरान: 128-। अऊर [हंझलाह बिन अबू सुफियान] से हम [सलीम बिन अब्दुल्लाह] का कहत सुने रहेन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम एक बार शोफवान बिन उमय्या, सुहैल बिन अमरू अऊर हरिथ बिन हिशम के खिलाफ -बुरी चीजन- के लिए प्रार्थना किहिन, फिर ई आयत उतरी: '-तुम उनके मामलन मा मामूली हस्तक्षेप नाहीं किहिन - उनके चाची- सचमुच, उ अन्यायी लोग हैं-' -प्रश्न। अली इमरान: 128-।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 6962, 7153, 7345, 8785, 10336, 11621, 11707, 11709, 12194, 12384, 12445, 12646, 12778, 12788, 12803, 12950, 13112, 13494
Imam Bukhari : 762, 948, 2603, 2934, 3251, 3252, 3762, 3780, 3781, 3785, 3786, 4193
Imam Muslim : 1082, 1083, 1084, 1085, 1086, 1087, 1088, 1089, 1090, 1091, 1092, 1093, 1094, 1095, 1096, 4571, 4572, 4573, 4574, 4575, 4576
Imam Abu Dawud : 1229, 1230, 1231, 1232, 1233
Imam Tirmidzi : 3876, 3884
Imam Nasa'i : 1060, 1061, 1062, 1063, 1064, 1065, 1066, 1067, 1068, 1069
Imam Ibnu Majah : 1233
Imam Darimi : 1547, 1548, 2412, 2413