इमाम दरिमी : 721
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ حَدَّثَنِي جَعْفَرُ بْنُ عَمْرِو بْنِ أُمَيَّةَ أَنَّ أَبَاهُ عَمْرَو بْنَ أُمَيَّةَ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ رَأَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَحْتَزُّ مِنْ كَتِفِ شَاةٍ فِي يَدِهِ ثُمَّ دُعِيَ إِلَى الصَّلَاةِ فَأَلْقَى السِّكِّينَ الَّتِي كَانَ يَحْتَزُّ بِهَا ثُمَّ قَامَ فَصَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ
हमें [अब्दुल्ला बिन सलीह] ने बताया कि: मुझे [अल लैट्स] ने बताया है, मुझे ['उकैल] ने [इब्न शिहाब] से बताया है [जाफर बिन 'अम्र बिन `उमैय्या] ने मुझे बताया है, कि उनके पिता - ['अम्र बिन `उमैय्या] - ने एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपने हाथ में बकरे का मांस छोटे टुकड़ों में काटते हुए देखा, फिर नमाज़ की आवाज़ हुई, तो उन्होंने वह चाकू नीचे रख दिया जिससे वह बकरा काट रहे थे, फिर वह खड़े हुए और बिना वुज़ू किए नमाज़ पढ़ी।
समर्थक हदीस :
इमाम अहमद : 414, 1884, 1890, 1898, 2079, 2172, 2223, 2225, 2282, 2338, 2393, 2414, 2942, 3142, 3181, 3229, 3274, 3285, 3604, 13780, 13931, 14549, 16611, 16612, 16613, 16951, 16952, 16956, 18273, 21446, 21447, 22747, 25214, 25294, 25396, 25405, 25585, 25843, 25850, 26088, 26089, 26090, 26091
इमाम बुखारी : 200, 201, 203, 634, 2706, 4985, 4988, 5002, 5041
इमाम मुस्लिम : 531, 532, 533, 534, 535, 536
इमाम अबू दाऊद : 159, 160, 161, 162, 163, 164
इमाम तिर्मिदज़ी : 75, 1759
इमाम नसाई : 182, 183, 184, 185
इमाम इब्नु माजा : 481, 483
इमाम मलिक : 44, 46, 48, 49
इमाम दरिमी : 721