Imam Darimi : 254
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا بَقِيَّةُ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ الْمُهَاصِرَ بْنَ حَبِيبٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ اللَّهُ تَعَالَى إِنِّي لَسْتُ كُلَّ كَلَامِ الْحَكِيمِ أَتَقَبَّلُ وَلَكِنِّي أَتَقَبَّلُ هَمَّهُ وَهَوَاهُ فَإِنْ كَانَ هَمُّهُ وَهَوَاهُ فِي طَاعَتِي جَعَلْتُ صَمْتَهُ حَمْدًا لِي وَوَقَارًا وَإِنْ لَمْ يَتَكَلَّمْ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अल मुबारक] हमसे कहिन है [बकिया] हमसे कहिन है [शदाका बिन अब्दुल्ला] कि [अल मुहाशिर बिन हबीब] ने कहा है: 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह कहते हैं': 'एक बुद्धिमान व्यक्ति के सब बातन का मैं स्वीकार नाहीं करत हौं, लेकिन मैं अक्सर ओकरे इच्छाओं के आधार पर स्वीकार करत हौं, इरादा अऊर इच्छा केवल मोर आज्ञा मा हैं, तब मैं ओकर चुप्पी का तारीफ बनावत हउँ, भले ही उ तोहरे तारीफ न करत हो।