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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Larangan berprasangka buruk
Imam Malik : 1412

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِيَّاكُمْ وَالظَّنَّ فَإِنَّ الظَّنَّ أَكْذَبُ الْحَدِيثِ وَلَا تَجَسَّسُوا وَلَا تَحَسَّسُوا وَلَا تَنَافَسُوا وَلَا تَحَاسَدُوا وَلَا تَبَاغَضُوا وَلَا تَدَابَرُوا وَكُونُوا عِبَادَ اللَّهِ إِخْوَانًا

हमरा [अबू अज़ जिनाद] स मालिक स [अबू हुरैरा] स [अल अ'राज] स रिवायत अछि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला जे शंका स बचू, कियाक त शंका बोलबा मे सबस झूठ अछि। एक दोसराक जासूसी नहि करू, एक दोसराक दोष नहि ताकू, सांसारिक विलासिताक खोज मे एक दोसरा सँ प्रतिस्पर्धा नहि करू, एक दोसरा सँ ईर्ष्या नहि करू, एक दोसरा सँ शत्रुता नहि करू आ एक दोसरा केँ काटि दियौक। भाई के रूप में अल्लाह के सेवक बनू।'

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 7402, 7520, 7536, 7770, 8148, 8365, 8581, 8690, 8746, 8757, 9387, 9620, 9682, 9698, 9828, 9861, 9979, 10112, 10237, 10283, 10527, 11630, 12230, 12580, 12702, 12703, 12875, 13425, 13505
Imam Bukhari : 4747, 5604, 5605, 5606, 5612, 6229
Imam Muslim : 4641, 4642, 4646, 4647, 4648, 4649, 4650
Imam Abu Dawud : 4264, 4271
Imam Tirmidzi : 1858, 1911
Imam Malik : 1411, 1412