Rasulullah bangun di waktu subuh dalam keadaan tidak memiliki air. Allah ta’ala kemudian menurunkan ayat tayamum
Imam Bukhari : 334
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ قَالَكُنْتُ جَالِسًا مَعَ عَبْدِ اللَّهِ وَأَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ فَقَالَ لَهُ أَبُو مُوسَى لَوْ أَنَّ رَجُلًا أَجْنَبَ فَلَمْ يَجِدْ الْمَاءَ شَهْرًا أَمَا كَانَ يَتَيَمَّمُ وَيُصَلِّي فَكَيْفَ تَصْنَعُونَ بِهَذِهِ الْآيَةِ فِي سُورَةِ الْمَائِدَةِ{ فَلَمْ تَجِدُوا مَاءً فَتَيَمَّمُوا صَعِيدًا طَيِّبًا }فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ لَوْ رُخِّصَ لَهُمْ فِي هَذَا لَأَوْشَكُوا إِذَا بَرَدَ عَلَيْهِمْ الْمَاءُ أَنْ يَتَيَمَّمُوا الصَّعِيدَ قُلْتُ وَإِنَّمَا كَرِهْتُمْ هَذَا لِذَا قَالَ نَعَمْ فَقَالَ أَبُو مُوسَى أَلَمْ تَسْمَعْ قَوْلَ عَمَّارٍ لِعُمَرَ بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي حَاجَةٍ فَأَجْنَبْتُ فَلَمْ أَجِد الْمَاءَ فَتَمَرَّغْتُ فِي الصَّعِيدِ كَمَا تَمَرَّغُ الدَّابَّةُ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِنَّمَا كَانَ يَكْفِيكَ أَنْ تَصْنَعَ هَكَذَا فَضَرَبَ بِكَفِّهِ ضَرْبَةً عَلَى الْأَرْضِ ثُمَّ نَفَضَهَا ثُمَّ مَسَحَ بِهِمَا ظَهْرَ كَفِّهِ بِشِمَالِهِ أَوْ ظَهْرَ شِمَالِهِ بِكَفِّهِ ثُمَّ مَسَحَ بِهِمَا وَجْهَهُ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ أَفَلَمْ تَرَ عُمَرَ لَمْ يَقْنَعْ بِقَوْلِ عَمَّارٍوَزَادَ يَعْلَى عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ كُنْتُ مَعَ عَبْدِ اللَّهِ وَأَبِي مُوسَى فَقَالَ أَبُو مُوسَى أَلَمْ تَسْمَعْ قَوْلَ عَمَّارٍ لِعُمَرَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَنِي أَنَا وَأَنْتَ فَأَجْنَبْتُ فَتَمَعَّكْتُ بِالصَّعِيدِ فَأَتَيْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرْنَاهُ فَقَالَ إِنَّمَا كَانَ يَكْفِيكَ هَكَذَا وَمَسَحَ وَجْهَهُ وَكَفَّيْهِ وَاحِدَةً
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन सलाम] कहिन; हमका [अबू मुआविया] का [अल अमासी] से [स्याकिक] से सूचित किहिन है, उ कहिन; मैं एक बार अब्दुल्ला बिन मसूद अऊर [अबू मूसा अल असियारी] के साथे बैठा रहा। तब अबू मूसा ने उनसे कहा कि अगर कोई जुनब का अनुभव करे और एक महीने तक पानी न मिला तो क्या वह तैमुम कर नमाज पढ़ेगा ? अऊर सूरह अल मैदाह आयत 6 मा ई आयत के बारे मा आपका का विचार है: '-तब तोहका पानी नाहीं मिलत है, तौ अच्छी - साफ - जमीन पर नमाज करा'? अब्दुल्ला, 'अगर ओनका ई मामला मा ढील दीन जात, तौ ई होइ सकत है कि भविष्य मा अगर ओनमा से केहू का पानी से ठंडा होइ जात है तौ उ जमीन से तैम्मम करिहैं'। स्याक ने पूछा, 'का आपका ई समस्या वहि कारक के कारण पसंद नाहीं है?' ऊ जवाब दिहिस, 'हाँ'। तब अबू मूसा ने कहा, 'क्या तुमने कभी ['अम्मर] को उमर से कहते नहीं सुना, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने मुझे एक काम पर भेजा, मैं तब जुनब और पानी नहीं मिला। यहिसे मैं जमीन पै लुढ़क गयौ जइसे जानवर लुढ़कत है। फिर हम ई बात पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहेन, अऊर उ कहिन: 'वास्तव मा अगर आप ई करब त आपके लिए काफी है'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर अपने हाथ के हथेली का जमीन पर मारा अऊर ओका हिलावा, फिर अपने बाएं हाथ के हथेली से अपने दाहिने हाथ के पीठ का रगड़िन, या अपने दाहिने हाथ के हथेली से अपनी बाईं हथेली के पीठ का रगड़िन, फिर उ आपन चेहरा रगड़िन।' अब्दुल्ला ने कहा, 'का तुमका पता नाहीं है कि उमर 'अम्मर के राय का नाहीं मानत हैं?' [या'ला] ने [शकीक] से [अल अमासी] से जोड़ा, 'मैं अब्दुल्ला अऊर अबू मूसा के साथ रहा। [अबू मूसा] तब कहिन, 'का तू नाहीं सुना कि ['अम्मर] उमर से का कहिन 'वास्तव मा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमका अऊर तुमका भेजिन, तब हम जुनब का अनुभव किहिन अऊर हम जमीन पर लुढ़क गइन। फिर हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलित है जे ओनका यहिके बारे मा बतावत हैं। फिर उ कहिन: 'वास्तव मा तुम बस ई कर सकत हौ'। फिर उ आपन हथेलियन का जमीन पर मारिस, फिर आपन चेहरा अऊर हथेलियन का एक बार पोंछिस।'
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 17603, 17607, 17608, 17611, 18125, 18130, 18721, 20407, 20587, 23164
Imam Bukhari : 322, 326, 327, 328, 329, 330, 331, 332, 333, 334, 335, 1809, 3396, 4766
Imam Muslim : 550, 551, 552, 553, 1893
Imam Abu Dawud : 274, 275, 276, 281, 282
Imam Tirmidzi : 115, 134, 135
Imam Nasa'i : 308, 310, 311, 312, 313, 314, 315, 316, 317, 318, 319, 320, 321, 322
Imam Ibnu Majah : 561, 562, 563, 1653
Imam Darimi : 738, 739