Tanah itu suci dan tidak najis tanah bisa dipakai untuk tayamum, dan dapat menyucikan junub
Imam Bukhari : 326
حَدَّثَنَا آدَمُ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا الْحَكَمُ عَنْ ذَرٍّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى عَنْ أَبِيهِقَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَقَالَ إِنِّي أَجْنَبْتُ فَلَمْ أُصِبْ الْمَاءَ فَقَالَ عَمَّارُ بْنُ يَاسِرٍ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ أَمَا تَذْكُرُ أَنَّا كُنَّا فِي سَفَرٍ أَنَا وَأَنْتَ فَأَمَّا أَنْتَ فَلَمْ تُصَلِّ وَأَمَّا أَنَا فَتَمَعَّكْتُ فَصَلَّيْتُ فَذَكَرْتُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا كَانَ يَكْفِيكَ هَكَذَا فَضَرَبَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِكَفَّيْهِ الْأَرْضَ وَنَفَخَ فِيهِمَا ثُمَّ مَسَحَ بِهِمَا وَجْهَهُ وَكَفَّيْهِ
हमसे [आदम] कहिके उ कहिन; हमसे कहिस है [स्यबाह] कहिन है, हमसे [अल हकाम] [जार] से [सैद बिन अब्दुर्रहमान बिन अब्ज़ा] से [उनके पिता] से कहिन है, 'एक आदमी उमर इब्नुल खठथब के पास आवा अऊर कहिस, 'मैंने जुनब का अनुभव किहिन लेकिन पानी नाहीं मिला?' त ['अम्मर बिन यासिर] उमर बिन अल खथब से कहिन, 'का तोहका याद नाहीं है कि हम जब यात्रा पर रहेन? उस समय तुम नमाज नहीं पढ़ा जब मैं जमीन पर लुढ़क रहा था और प्रार्थना कर रहा था ? फिर हम ई बात पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तक पहुँचाइन, अऊर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'असल मा, आपके लिए ई करब काफी है'। फिर उ आपन हथेलियन का जमीन पर मारिस अऊर ओनके ऊपर उड़ाइस, फिर ओनका अपने चेहरा अऊर हथेलियन पर रगड़िस।'