Diperbolehkan bermalam dua malam saja (Nafar Awwal) bagi yang ingin cepat kembali
Imam Malik : 815حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ حَزْمٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ أَبَا الْبَدَّاحِ بْنَ عَاصِمِ بْنِ عَدِيٍّ أَخْبَرَهُ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْخَصَ لِرِعَاءِ الْإِبِلِ فِي الْبَيْتُوتَةِ خَارِجِينَ عَنْ مِنًى يَرْمُونَ يَوْمَ النَّحْرِ ثُمَّ يَرْمُونَ الْغَدَ وَمِنْ بَعْدِ الْغَدِ لِيَوْمَيْنِ ثُمَّ يَرْمُونَ يَوْمَ النَّفْرِ
याह्या हमरा अब्दुल्लाह बिन अबू बकर बिन हज़म सँ मालिक सँ अपन पिता सँ बतौलनि जे अबू अल-बदाह बिन असीम बिन आदि हुनका अपन पिता सँ बतौलनि, कहैत छलाह, "अल्लाह केर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) ऊँट चरबाह केँ मीना सँ बाहर राति बिताबय के अनुमति देलनि। ओ सब 10 के दिन जमारत पर पत्थर मारि दैत छलाह।" नहर, फेर दोसर दिन फेर सँ पाथर मारि दियौक आ फेर ओकर बाद दू दिन धरि, फेर नफरक दिन फेर सँ पाथर मारि दियौक।"