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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



Imam Malik : 594

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ وَأَبَا هُرَيْرَةَاخْتَلَفَا فِي قَضَاءِ رَمَضَانَ فَقَالَ أَحَدُهُمَا يُفَرِّقُ بَيْنَهُ وَقَالَ الْآخَرُ لَا يُفَرِّقُ بَيْنَهُ لَا أَدْرِي أَيَّهُمَا قَالَ يُفَرِّقُ بَيْنَهُ

याह्या हमरा से मलिक से [इब्न शिहाब] से बतवले कि [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] अवुरी [अबू हुरैराह] में रमजान के रोजा के भरपाई कईसे कईल जाला, एकरा बारे में मतभेद रहे। ओहमें से एगो कहलसि कि ओह लोग के भेद होखे के चाहीं, दोसरका कहलसि कि ओह लोग के भेद ना होखे के चाहीं. पता ना दुनु में से कवन कहलसि कि 'एह लोग में अंतर होखे के चाहीं.'