Janganlah kalian memasuki tempat suatu kaum yang diadzab kecuali jika kalian menangis (sedih) agar tidak tertimpa azab seperti mereka
Imam Bukhari : 3130
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَهْبٌ حَدَّثَنَا أَبِي سَمِعْتُ يُونُسَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ أَنَّ ابْنَ عُمَرَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَدْخُلُوا مَسَاكِنَ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ إِلَّا أَنْ تَكُونُوا بَاكِينَ أَنْ يُصِيبَكُمْ مِثْلُ مَا أَصَابَهُمْ
ई मोका बतावा गा है [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद] हमसे कहिस है [वाहब] हमसे [मेरे पिता] से कहिस है, हम [सलीम] से [अज जुहरी] से [यूनुस] सुने रहेन कि [इबनू उमर] कहिन, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम कहिन: 'उन लोगन के निवास मा न घुसौ जे अपने आप का डर के डर से अन्याय किहिन हैं, एक आपदा से प्रभावित जइसे कि ओनके साथे भा'।