इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ibnu Majah : 4202

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ مُوسَى عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَسْرَعُ الْخَيْرِ ثَوَابًا الْبِرُّ وَصِلَةُ الرَّحِمِ وَأَسْرَعُ الشَّرِّ عُقُوبَةً الْبَغْيُ وَقَطِيعَةُ الرَّحِمِ

हमसे कहिन है [सुवैद बिन सैद] हमसे [सालीह बिन मूसा] से [मुआविया बिन इशाक] से ['ऐस्याह बिन थल्हा] से ['ऐस्याह उम्मुल मुकमिनिन] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अच्छे काम जेकर तुरंत इनाम मिली, उ अच्छा करब अऊर दोस्ती के बंधन का जोड़ब है, जबकि पापपूर्ण काम जेका तुरंत दंडित कीन जाई, उ अन्याय अऊर दोस्ती के बंधन का तोड़ब है'।