Imam Ibnu Majah : 1
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَمَرْتُكُمْ بِهِ فَخُذُوهُ وَمَا نَهَيْتُكُمْ عَنْهُ فَانْتَهُوا
हमका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन; हमसे [शरीक] [अल अमासी] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से संबंधित है उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो मैं हुकुम देता हूँ, ले लो, और जो मना करूँ, छोड़ो'।
Imam Ibnu Majah : 2
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ قَالَ أَنْبَأَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَرُونِي مَا تَرَكْتُكُمْ فَإِنَّمَا هَلَكَ مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ بِسُؤَالِهِمْ وَاخْتِلَافِهِمْ عَلَى أَنْبِيَائِهِمْ فَإِذَا أَمَرْتُكُمْ بِشَيْءٍ فَخُذُوا مِنْهُ مَا اسْتَطَعْتُمْ وَإِذَا نَهَيْتُكُمْ عَنْ شَيْءٍ فَانْتَهُوا
हमसे [मुहम्मद बिन अश शब्बाह] कहिन है, उ कहिन; हमका [जरीर] से [अल अमासी] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से रिपोर्ट किहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कुछ मैंने छोड़ा है, वह दे। सचमुच, आपसे पहिले वाले अपने नबियन के साथे अपने सवालन अऊर विवादन के कारण नष्ट होइ गए। अगर मैं तोहका कुछ करै का आदेश देत हउँ तौ ओका सबसे अच्छा करौ, अऊर अगर मैं तोहका कुछ मना करत हउँ तौ ओसे दूर रहौ'।
Imam Ibnu Majah : 3
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَطَاعَنِي فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ وَمَنْ عَصَانِي فَقَدْ عَصَى اللَّهَ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहिन, हमसे कहिन [अबू मुआविया], अऊर [वाकी'] [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जे मोर बात मानत है ऊ अल्लाह का मानत है अऊर जे मोर बात ना मानत है ऊ अल्लाह का ना मानत है'।
Imam Ibnu Majah : 4
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ عَنْ ابْنِ الْمُبَارَكِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سُوقَةَ عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ قَالَكَانَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا سَمِعَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا لَمْ يَعْدُهُ وَلَمْ يُقَصِّرْ دُونَهُ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] कहिन, हमसे [जकरिया बिन आदि] [इब्न मुबारक] से [मुहम्मद बिन सुकाह] से [अबू जाफर] कहिन; '[इब्नू उमर] अगर उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीस सुनत रहें, तौ उ ओका छूटत नाहीं रहें अऊर न ही उ कउनो अउर काम मा व्यस्त रहें'।
Imam Ibnu Majah : 5
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى بْنِ سُمَيْعٍ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَفْطَسُ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْجُرَشِيِّ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ قَالَخَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ نَذْكُرُ الْفَقْرَ وَنَتَخَوَّفُهُ فَقَالَ أَالْفَقْرَ تَخَافُونَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَتُصَبَّنَّ عَلَيْكُمْ الدُّنْيَا صَبًّا حَتَّى لَا يُزِيغَ قَلْبَ أَحَدِكُمْ إِزَاغَةً إِلَّا هِيهْ وَايْمُ اللَّهِ لَقَدْ تَرَكْتُكُمْ عَلَى مِثْلِ الْبَيْضَاءِ لَيْلُهَا وَنَهَارُهَا سَوَاءٌقَالَ أَبُو الدَّرْدَاءِ صَدَقَ وَاللَّهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرَكَنَا وَاللَّهِ عَلَى مِثْلِ الْبَيْضَاءِ لَيْلُهَا وَنَهَارُهَا سَوَاءٌ
हमसे कहिन [हिस्याम बिन 'अम्मर अद दिमासिकी] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन ईसा बिन सुमई'] कहिन, हमसे [इब्राहिम बिन सुलेमान अल अफ्तस] से [अल वालिद बिन अब्दुर्रहमान अल जुरासी] से [जुबैर बिन नुफैर] से [अबू दरदा`] कहिन; 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमसे मिले निकले, जब हम गरीबी के मुद्दा पर चर्चा करत रहेन अऊर हमका उनसे डर लागत रहा। फिर बोला- 'गरीबी से डेरात हौ का? जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, ओके द्वारा दुनिया तोहका दीन जाई, ताकि तोहरे में से एक के दिल ओसे मिलै के अलावा मुड़ न सकै। सचमुच, मैं तोहरे लिए चीजन का छोड़ि दिहे हउँ जवन तेजी से जगमगात हैं, रात अऊर दिन एकै हैं'। अबू दरदा` कहिन; 'अल्लाह के कसम सच है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरे लिए अइसन चीजें छोड़ि दिहिन हैं जवन तेज रोशनी से जगमगात हैं, रात दिन एकै हैं'।
Imam Ibnu Majah : 6
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي مَنْصُورِينَ لَا يَضُرُّهُمْ مَنْ خَذَلَهُمْ حَتَّى تَقُومَ السَّاعَةُ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमसे [स्यूबाह] [मुआविया बिन कुराह] से [अपने पिता] से कहिन; उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरे लोगन का एक समूह हमेशा होई जेका मदद मिली। जे ओनका तिरस्कार करत हैं, उ पुनरुत्थान के दिन तक ओनका नुकसान नाहीं पहुँचाइहैं'।
Imam Ibnu Majah : 7
حَدَّثَنَا أَبُو عَبْد اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَلْقَمَةَ نَصْرُ بْنُ عَلْقَمَةَ عَنْ عُمَيْرِ بْنِ الْأَسْوَدِ وَكَثِيرِ بْنِ مُرَّةَ الْحَضْرَمِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي قَوَّامَةً عَلَى أَمْرِ اللَّهِ لَا يَضُرُّهَا مَنْ خَالَفَهَا
अबू अब्दुल्ला हमसे कहिन कि उ कहिन; हमसे [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन है, उ कहिन; हमसे कहिन है [यह्या बिन हमजाह] कहिन; हमसे [अबू अलकमह नशर बिन अलकमह] [उमैर अल असवाद] से अऊर [कत्सिर बिन मुर्राह अल हदलरामी] से [अबू हुरैरा] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरे लोगन का हमेशा एक समूह होई जवन अल्लाह के हुकुम पर दृढ़ता से खड़ा होई, जे ओनसे असहमत लोगन का नुकसान नाहीं पहुंचाई'।
Imam Ibnu Majah : 8
حَدَّثَنَا أَبُو عَبْد اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا الْجَرَّاحُ بْنُ مَلِيحٍ حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ زُرْعَةَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عِنَبَةَ الْخَوْلَانِيَّ وَكَانَ قَدْ صَلَّى الْقِبْلَتَيْنِ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَزَالُ اللَّهُ يَغْرِسُ فِي هَذَا الدِّينِ غَرْسًا يَسْتَعْمِلُهُمْ فِي طَاعَتِهِ
अबू अब्दुल्ला हमसे कहिन कि उ कहिन; हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन, हमसे कहिन [अल जर्राह बिन मलिह] कहिन, हमसे कहिन [बकर बिन ज़ुरअह] उ कहिन; हम [अबू इनाबाह अल खौलानी] का सुनेन अऊर उ एक दोस्त रहे जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे दुइनौ क़िबला के सामने नमाज पढ़त रहे, उ कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'अल्लाह हमेशा ई धर्म मा पौधा -सुधारक- लगाई, जेका उ आपन आज्ञा माने के निर्देशित करिहैं'।
Imam Ibnu Majah : 9
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ نَافِعٍ حَدَّثَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ أَرْطَاةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَامَ مُعَاوِيَةُ خَطِيبًا فَقَالَ أَيْنَ عُلَمَاؤُكُمْ أَيْنَ عُلَمَاؤُكُمْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ إِلَّا وَطَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي ظَاهِرُونَ عَلَى النَّاسِ لَا يُبَالُونَ مَنْ خَذَلَهُمْ وَلَا مَنْ نَصَرَهُمْ
हमसे कहिन [याकूब बिन हुमैद बिन कासिब] कहिन, हमसे कहिन [अल कासिम बिन नफी'] कहिन, हमसे [अल हज्जाज बिन अर्थह] [अमरू बिन स्यूअैब] से [अपने पिता] से कहिन; [मुआविया] उपदेश के लिए खड़ा होइ गवा, तब उ कहिन; 'तुम्हारे विद्वान कहाँ हैं? कहाँ हैं तुम्हारे विद्वान? हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'कयामत का दिन तब तक नाहीं होई जब तक कि हमार उम्मत के एक समूह सब मनुष्यन पर जीत नाहीं पावत, उ लोग न तो ओनके अपमान करै वालेन पर ध्यान देइहैं अऊर न ही ओनके मदद करै वालेन पर ध्यान देइहैं'।
Imam Ibnu Majah : 10
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ شُعَيْبٍ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ بَشِيرٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَبِي أَسْمَاءَ الرَّحَبِيِّ عَنْ ثَوْبَانَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَزَالُ طَائِفَةٌ مِنْ أُمَّتِي عَلَى الْحَقِّ مَنْصُورِينَ لَا يَضُرُّهُمْ مَنْ خَالَفَهُمْ حَتَّى يَأْتِيَ أَمْرُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ
हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन स्यूअैब] कहिन, हमका बताइन [सैद बिन बसीर] से [कतादाह] से [अबू किलाबाह] से [अबू असमा` अर रहबी] से [त्सौबान] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरे लोगन का हमेशा एक समूह होई जेका सच्चाई से मदद मिली, जब तक कि अल्लाह के फैसला न आवै तब तक सच्चाई से असहमत लोगन का नुकसान न पहुंचाई'।
Imam Ibnu Majah : 11
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ قَالَ سَمِعْتُ مُجَالِدًا يَذْكُرُ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَطَّ خَطًّا وَخَطَّ خَطَّيْنِ عَنْ يَمِينِهِ وَخَطَّ خَطَّيْنِ عَنْ يَسَارِهِ ثُمَّ وَضَعَ يَدَهُ فِي الْخَطِّ الْأَوْسَطِ فَقَالَ هَذَا سَبِيلُ اللَّهِ ثُمَّ تَلَا هَذِهِ الْآيَةَ{ وَأَنَّ هَذَا صِرَاطِي مُسْتَقِيمًا فَاتَّبِعُوهُ وَلَا تَتَّبِعُوا السُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمْ عَنْ سَبِيلِهِ }
हमसे कहिन [अबू सैद अब्दुल्ला बिन सैद] कहिन, हमसे कहिन [अबू खालिद अल अहमर] उ कहिन; हम [मुजालिद] का [जाबिर बिन अब्दुल्ला] से [अश स्याबी] से उल्लेख सुनेन, उ कहिन; 'हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पक्ष मा रहेन, उ तब एक लाइन बनाइन, फिर अपने दाहिने तरफ दुइ लाइन बनाइन अऊर अपने बाईं तरफ दुइ अउर लाइन बनाइन। फिर उ आपन हाथ बीच के रेखा पर रखिन अऊर कहिन: 'ई अल्लाह के रास्ता है'। फिर उ ई श्लोक पढ़िन: 'अऊर उ - जवन हम आज्ञा दिहे हई - ई हमार सीधा रास्ता है, एहसे ओकरे अनुसरण करौ; अऊर दूसर रास्ता न चलौ, काहे से कि उ तोहका ओकरे रास्ता से बिखेर देइहैं'।
Imam Ibnu Majah : 12
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ حَدَّثَنِي الْحَسَنُ بْنُ جَابِرٍ عَنْ الْمِقْدَامِ بْنِ مَعْدِيكَرِبَ الْكِنْدِيِّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يُوشِكُ الرَّجُلُ مُتَّكِئًا عَلَى أَرِيكَتِهِ يُحَدَّثُ بِحَدِيثٍ مِنْ حَدِيثِي فَيَقُولُ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ كِتَابُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ مَا وَجَدْنَا فِيهِ مِنْ حَلَالٍ اسْتَحْلَلْنَاهُ وَمَا وَجَدْنَا فِيهِ مِنْ حَرَامٍ حَرَّمْنَاهُ أَلَّا وَإِنَّ مَا حَرَّمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلُ مَا حَرَّمَ اللَّهُ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, उ कहिन; हमसे [जैद इब्नू अल हुबाब] [मुआविया बिन सालिह] से कहिन है, [अल हसन बिन जाबिर] से [अल मिकदाम बिन म'दिकारिब अल किंदी] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'डर रहा कि कोई उनकी सीट पर पीछे झुक जाए, उन्हें मुझसे एक हदीस बताई गई, लेकिन उन्होंने कहा; 'हमरे अउर तोहरे बीच मा अल्लाह अज्जा वजल्ला के किताब है। हमका वहिसे जवन हलाल लागत है, हम हलाल बनावत हैं, अऊर जवन हमका वहिसे हराम लागत है, हम ओका हराम बनावत हैं'। जानौ, वाकई, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम द्वारा जवन मना कीन गा रहा, उहै अल्लाह मना किहिन है।'
Imam Ibnu Majah : 13
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ فِي بَيْتِهِ أَنَا سَأَلْتُهُ عَنْ سَالِمٍ أَبِي النَّضْرِ ثُمَّ مَرَّ فِي الْحَدِيثِ قَالَ أَوْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا أُلْفِيَنَّ أَحَدَكُمْ مُتَّكِئًا عَلَى أَرِيكَتِهِ يَأْتِيهِ الْأَمْرُ مِمَّا أَمَرْتُ بِهِ أَوْ نَهَيْتُ عَنْهُ فَيَقُولُ لَا أَدْرِي مَا وَجَدْنَا فِي كِتَابِ اللَّهِ اتَّبَعْنَاهُ
हमसे कहिन है [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहिन, हमसे कहिन हैं [सुफयान बिन उयैना] -मैंने उनसे उनके घरे पूछा- [सलीम अबू अल नदलर] से -फिर उ एक हदीस पढ़िन-, उ कहिन; या [जैद बिन असलम] से [उबैदुल्लाह बिन अबू रफी] से [अपने पिता] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में तुम में से एक अपनी सीट पर वापस बैठा पाया जाएगा, फिर वह मेरे आदेश और मनाही पर आएगा, लेकिन वह कहेगा; 'हमका पता नाहीं रहा कि हमका अल्लाह के किताब मा का मिला, यहिसे हम वहिके पालन किहेन।'
Imam Ibnu Majah : 14
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَحْدَثَ فِي أَمْرِنَا هَذَا مَا لَيْسَ مِنْهُ فَهُوَ رَدٌّ
हमसे कहिन [अबू मरवान मुहम्मद बिन उथमान अल उत्समानी] कहिन, हमसे [इब्राहिम बिन सद बिन इब्राहिम बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] से [अपने पिता] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से [ऐस्याह] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हमरे कामन मा जे कौनो नया मामला पैदा करत है जवन ओकर हिस्सा नाहीं है, ऊ खारिज होइ जात है'।
Imam Ibnu Majah : 15
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحِ بْنِ الْمُهَاجِرِ الْمِصْرِيُّ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الزُّبَيْرِ حَدَّثَهُأَنَّ رَجُلًا مِنْ الْأَنْصَارِ خَاصَمَ الزُّبَيْرَ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي شِرَاجِ الْحَرَّةِ الَّتِي يَسْقُونَ بِهَا النَّخْلَ فَقَالَ الْأَنْصَارِيُّ سَرِّحْ الْمَاءَ يَمُرُّ فَأَبَى عَلَيْهِ فَاخْتَصَمَا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْقِ يَا زُبَيْرُ ثُمَّ أَرْسِلْ الْمَاءَ إِلَى جَارِكَ فَغَضِبَ الْأَنْصَارِيُّ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنْ كَانَ ابْنَ عَمَّتِكَ فَتَلَوَّنَ وَجْهُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا زُبَيْرُ اسْقِ ثُمَّ احْبِسْ الْمَاءَ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَى الْجَدْرِ قَالَ فَقَالَ الزُّبَيْرُ وَاللَّهِ إِنِّي لَأَحْسِبُ هَذِهِ الْآيَةَ نَزَلَتْ فِي ذَلِكَ{ فَلَا وَرَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ حَتَّى يُحَكِّمُوكَ فِيمَا شَجَرَ بَيْنَهُمْ ثُمَّ لَا يَجِدُوا فِي أَنْفُسِهِمْ حَرَجًا مِمَّا قَضَيْتَ وَيُسَلِّمُوا تَسْلِيمًا }
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन रुम्ह बिन अल मुहाजिर अल मिश्री] ने कहा, हमसे [अल लैस्ट बिन सद] [इब्नू शिहाब] से [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] से कहा है कि [अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] ने उनसे कहा है, कि एक अंसार आदमी रसूलुल्लाह सल्लाह वल्लाम के पानी के मुद्दे के बारे में अज जुबैर के साथ बहस किहिन खजूर के पेड़न का पानी देय के ताईं। अंसार कहिन; 'पानी का गुजरै दे,' लेकिन अज़ जुबैर ने कौनो ध्यान नाहीं दिहिन। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने दुइनौ जने के बीच बहस होइ गै। तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'पानी - अपने बगीचे - हे जुबैर, उसके बाद अपने पड़ोसियों को पानी बहाओ'। लेकिन अंसार गुस्सा होइके कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, का एहसे कि उ आपके चाचा के बेटवा अहै?' फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का चेहरा बदल गवा, तब उ कहिन: 'हे जुबैर पानी -अपने बगीचे-, फिर पानी का रोकौ ताकि उ अपने मूल मा लौटि जाय'। अब्दुल्ला बिन जुबैर कहिन; त जुबैर कहिन: 'अल्लाह के कसम, हमका लागत है कि ई आयत उ घटना मा प्रकट भै रही: 'त तोहरे रब्ब के कसम, उ - संक्षेप मा - तब तक विश्वास नाहीं करत हैं जब तक कि उ आपका उ मामला मा न्यायाधीश नाहीं बनावत हैं जेहि पर उ विवाद करत हैं, तब तक उ आपके द्वारा दिए गए फैसले पर उनके दिल मा कौनो आपत्ति नाहीं है, अऊर उ ओका पूरी तरह से स्वीकार करत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 16
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى النَّيْسَابُورِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَمْنَعُوا إِمَاءَ اللَّهِ أَنْ يُصَلِّينَ فِي الْمَسْجِدِفَقَالَ ابْنٌ لَهُ إِنَّا لَنَمْنَعُهُنَّ فَغَضِبَ غَضَبًا شَدِيدًا وَقَالَ أُحَدِّثُكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَقُولُ إِنَّا لَنَمْنَعُهُنَّ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन यह्या अन नैसाबुरी] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुर्राजाक] कहिन, हमसे [ममर] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [इब्न उमर] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह के महिला नौकरन का मस्जिद मा नमाज पढ़ै से मना न करौ'। तब एक बच्चा बोला; 'वाकई, हम ओनका प्रतिबंधित करब'। यहिसे इब्नू उमर गुस्सा मा आवा अऊर डांट दिहिस; 'हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हदीस पढ़ेन, लेकिन तुम कहिन; 'वाकई, हम ओनका प्रतिबंधित करब'।'
Imam Ibnu Majah : 17
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ وَأَبُو عَمْرٍو حَفْصُ بْنُ عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍأَنَّهُ كَانَ جَالِسًا إِلَى جَنْبِهِ ابْنُ أَخٍ لَهُ فَخَذَفَ فَنَهَاهُ وَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْهَا فَقَالَ إِنَّهَا لَا تَصِيدُ صَيْدًا وَلَا تَنْكِي عَدُوًّا وَإِنَّهَا تَكْسِرُ السِّنَّ وَتَفْقَأُ الْعَيْنَقَالَ فَعَادَ ابْنُ أَخِيهِ فَخَذَفَ فَقَالَ أُحَدِّثُكَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْهَا ثُمَّ عُدْتَ تَخْذِفُ لَا أُكَلِّمُكَ أَبَدًا
हमका बतावा गा है कि [अहमद बिन थाबित अल जादरी] अऊर [अबू अमरू हफश बिन उमर] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दुल वहाब अत्स त्साकाफी] ने कहा, हमसे [अय्यूब] से [सैद बिन जुबैर] से [अब्दुल्ला बिन मुगफ्फल] से कहा है, कि उनकर एक भतीजा उनके बगल मा बैठा रहा, फिर उ गुलेल मारिन। यहिसे ऊ ओका रोकिस अऊर कहिस; सचमुच रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मना कर दिया है उ कहिन: 'ई क्रिया शिकार का शिकार नाहीं कइ सकत है, न दुश्मन का नाश कइ सकत है। ऊ खाली दाँत तोड़त है अऊर आँखिन का काटत है'।
Imam Ibnu Majah : 18
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ حَدَّثَنِي بُرْدُ بْنُ سِنَانٍ عَنْ إِسْحَقَ بْنِ قَبِيصَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ عُبَادَةَ بْنَ الصَّامِتِ الْأَنْصَارِيَّ النَّقِيبَ صَاحِبَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَزَا مَعَ مُعَاوِيَةَ أَرْضَ الرُّومِ فَنَظَرَ إِلَى النَّاسِ وَهُمْ يَتَبَايَعُونَ كِسَرَ الذَّهَبِ بِالدَّنَانِيرِ وَكِسَرَ الْفِضَّةِ بِالدَّرَاهِمِ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَأْكُلُونَ الرِّبَا سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تَبْتَاعُوا الذَّهَبَ بِالذَّهَبِ إِلَّا مِثْلًا بِمِثْلٍ لَا زِيَادَةَ بَيْنَهُمَا وَلَا نَظِرَةًفَقَالَ لَهُ مُعَاوِيَةُ يَا أَبَا الْوَلِيدِ لَا أَرَى الرِّبَا فِي هَذَا إِلَّا مَا كَانَ مِنْ نَظِرَةٍ فَقَالَ عُبَادَةُ أُحَدِّثُكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَتُحَدِّثُنِي عَنْ رَأْيِكَ لَئِنْ أَخْرَجَنِي اللَّهُ لَا أُسَاكِنُكَ بِأَرْضٍ لَكَ عَلَيَّ فِيهَا إِمْرَةٌ فَلَمَّا قَفَلَ لَحِقَ بِالْمَدِينَةِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ مَا أَقْدَمَكَ يَا أَبَا الْوَلِيدِ فَقَصَّ عَلَيْهِ الْقِصَّةَ وَمَا قَالَ مِنْ مُسَاكَنَتِهِ فَقَالَ ارْجِعْ يَا أَبَا الْوَلِيدِ إِلَى أَرْضِكَ فَقَبَحَ اللَّهُ أَرْضًا لَسْتَ فِيهَا وَأَمْثَالُكَ وَكَتَبَ إِلَى مُعَاوِيَةَ لَا إِمْرَةَ لَكَ عَلَيْهِ وَاحْمِلْ النَّاسَ عَلَى مَا قَالَ فَإِنَّهُ هُوَ الْأَمْرُ
हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मार] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन हमजाह] कहिन, हमका बताइन [बुर्द बिन सिनान] से [इशाक बिन काबीशाह] से [अपने पिता] कहिन; [उबादह बिन शमित अल अंसारी] रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के एक सेनापति अऊर दोस्त रहे जे रोमन दुनिया मा मुआविया के साथे लड़े रहे। उ लोगन का देखिन जे सोने के टुकड़ा दीनार मा अऊर चाँदी के टुकड़ा दिरहम मा खरीदत अऊर बेचत रहें। फिर उ चिल्लाया; 'हे लोग, सचमुच आपने सूद खपत किया है, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को कहते सुना है: 'जब तक तुलनीय न हो तब तक सोना सोने के बदले मत बेचो, न तो फालतू है और न ही दोनों के बीच कोई देरी है'। मुआवियाह ने उनसे कहा; 'हे अबुल वालिद, हमका ई लेन-देन मा सूद नाहीं देखात है, सिवाय एकर निलंबन के! ' उबादा जवाब दिहिस; 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से हदीस आप तक पहुंचाई, लेकिन आप अपने विचार से सोचते हैं। सचमुच, अगर अल्लाह मोका बाहर निकाल देई, तौ मैं आपके आदेश मा होए के बावजूद आपके इलाका मा नाहीं रहब'। जब उ मदीना लौटिन तौ उमर बिन खठथब से मिले, फिर उमर उनसे कहिन, 'हे अबुल वालिद, तुमका इहाँ का आवा रहा? फिर उ उमर से ई कहानी सुनाइन, अऊर उ ओनका ई बारे मा नाहीं बताइन कि उ कहाँ रहत रहें। उमर ने कहा: 'हे अबुल वालिद, अपने देश वापस जाओ। सचमुच, अल्लाह आपके अऊर आपके जइसन लोगन के बिना एक देश का तिरस्कृत बना देई'। तब उमर ने मुआविया को एक चिट्ठी लिखी; 'तुमका ओका आदेश देय का कौनो अधिकार नाहीं है, अऊर लोगन का ओकरे कहे के पालन करै का आमंत्रित करै का नाहीं है, काहे से कि ऊ सच्चाई से ऊपर है'।
Imam Ibnu Majah : 19
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ الْخَلَّادِ الْبَاهِلِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ أَنْبَأَنَا عَوْنُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَإِذَا حَدَّثْتُكُمْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَظُنُّوا بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الَّذِي هُوَ أَهْنَاهُ وَأَهْدَاهُ وَأَتْقَاهُ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अल खल्लाद अल बहिली] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन सैद] से [इब्न अजलान] कहिन, हमसे कहिन [अउन बिन अब्दुल्ला] से [अब्दुल्ला बिन मसूद] उ कहिन; 'अगर मैं तोहका अल्लाह के रसूल से हदीस पढ़त हउँ, तौ मान लीन जाय कि अल्लाह के रसूल ओका पहुँचाइन, उ निर्देश दिहिन अऊर उ धर्मनिष्ठा के वसीयत दिहिन'।
Imam Ibnu Majah : 20
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي الْبَخْتَرِيِّ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَ إِذَا حَدَّثْتُكُمْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَظُنُّوا بِهِ الَّذِي هُوَ أَهْنَاهُ وَأَهْدَاهُ وَأَتْقَاهُ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे [यह्या बिन सईद] से [स्यु'बाह] से [अमरू बिन मुर्रा] से [अबुल बहकतारी] से [अबू अब्दुर्रहमान अस सुलामी] से [अली बिन अबू तालिब] कहिन; 'जब हम तोहका रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से एक हदीस पढ़ेन, तौ मान लीन जाय कि रसूलल्लाह ओका पहुँचाइन, उ निर्देश दिहिन अऊर उ धर्मनिष्ठा के वसीयत दिहिन'।