Dua muslim saling membunuh, keduanya masuk Neraka
Imam Ibnu Majah : 3954
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ وَسَعِيدِ بْنِ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا الْتَقَى الْمُسْلِمَانِ بِسَيْفَيْهِمَا فَالْقَاتِلُ وَالْمَقْتُولُ فِي النَّارِ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا الْقَاتِلُ فَمَا بَالُ الْمَقْتُولِ قَالَ إِنَّهُ أَرَادَ قَتْلَ صَاحِبِهِ
हमसे कहिन है [अहमद बिन सिनान] हमसे [यजीद बिन हारून] [सुलेमान अत तैमी] से अऊर [सैद बिन अबू अरूबा] से [कतादाह] से [अल हसन] से [अबू मूसा] से कहिन है, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल, शांति अऊर बरकत ओनके ऊपर हो, कहिन: 'अगर ओनके दुइ तलवारन से मिलत हैं, तौ उ व्यक्ति का मारत है मारा गा नरक मा है'। साथी बोले कि या रसूल अल्लाह मारने वाले के लायक है नरक तो मारे जाने वाले का क्या ? ऊ कहिस: 'काहे से कि ऊ भी अपने दोस्त का मार डारै चाहत रहा'।