Imam Ibnu Majah : 3940
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عُثْمَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا مُعَانُ بْنُ رِفَاعَةَ السَّلَامِيُّ حَدَّثَنِي أَبُو خَلَفٍ الْأَعْمَى قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ أُمَّتِي لَا تَجْتَمِعُ عَلَى ضَلَالَةٍ فَإِذَا رَأَيْتُمْ اخْتِلَافًا فَعَلَيْكُمْ بِالسَّوَادِ الْأَعْظَمِ
हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन उस्मान अद दिमासिकी] हमसे कहिन हैं [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे कहिन हैं [मान बिन रिफाअह अस सलामी] हमसे कहिन हैं [अबू खलफ अल आमा] उ कहिन; हम [अनस बिन मलिक] का कहत सुने रहेन, 'हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'वास्तव मा हमार उम्मत गलती पर एकजुट नाहीं होई, अगर आप कलह देखत हई त आपका सावदुल अदज़म मा होब जरूरी है - सबसे बड़ा समूह; अर्थ सुन्नत के अनुरूप है-'।