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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ibnu Majah : 3910

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُوسَى الْأَشْيَبُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ بَهْدَلَةَ عَنْ الْمُسَيَّبِ بْنِ رَافِعٍ عَنْ خَرَشَةَ بْنِ الْحُرِّ قَالَقَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فَجَلَسْتُ إِلَى شِيَخَةٍ فِي مَسْجِدِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ شَيْخٌ يَتَوَكَّأُ عَلَى عَصًا لَهُ فَقَالَ الْقَوْمُ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى رَجُلٍ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَلْيَنْظُرْ إِلَى هَذَا فَقَامَ خَلْفَ سَارِيَةٍ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ فَقُمْتُ إِلَيْهِ فَقُلْتُ لَهُ قَالَ بَعْضُ الْقَوْمِ كَذَا وَكَذَا قَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ الْجَنَّةُ لِلَّهِ يُدْخِلُهَا مَنْ يَشَاءُ وَإِنِّي رَأَيْتُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رُؤْيَا رَأَيْتُ كَأَنَّ رَجُلًا أَتَانِي فَقَالَ لِي انْطَلِقْ فَذَهَبْتُ مَعَهُ فَسَلَكَ بِي فِي نَهْجٍ عَظِيمٍ فَعُرِضَتْ عَلَيَّ طَرِيقٌ عَلَى يَسَارِي فَأَرَدْتُ أَنْ أَسْلُكَهَا فَقَالَ إِنَّكَ لَسْتَ مِنْ أَهْلِهَا ثُمَّ عُرِضَتْ عَلَيَّ طَرِيقٌ عَنْ يَمِينِي فَسَلَكْتُهَا حَتَّى إِذَا انْتَهَيْتُ إِلَى جَبَلٍ زَلَقٍ فَأَخَذَ بِيَدِي فَزَجَّلَ بِي فَإِذَا أَنَا عَلَى ذُرْوَتِهِ فَلَمْ أَتَقَارَّ وَلَمْ أَتَمَاسَكْ وَإِذَا عَمُودٌ مِنْ حَدِيدٍ فِي ذُرْوَتِهِ حَلْقَةٌ مِنْ ذَهَبٍ فَأَخَذَ بِيَدِي فَزَجَّلَ بِي حَتَّى أَخَذْتُ بِالْعُرْوَةِ فَقَالَ اسْتَمْسَكْتَ قُلْتُ نَعَمْ فَضَرَبَ الْعَمُودَ بِرِجْلِهِ فَاسْتَمْسَكْتُ بِالْعُرْوَةِ فَقَالَ قَصَصْتُهَا عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رَأَيْتَ خَيْرًا أَمَّا الْمَنْهَجُ الْعَظِيمُ فَالْمَحْشَرُ وَأَمَّا الطَّرِيقُ الَّتِي عُرِضَتْ عَنْ يَسَارِكَ فَطَرِيقُ أَهْلِ النَّارِ وَلَسْتَ مِنْ أَهْلِهَا وَأَمَّا الطَّرِيقُ الَّتِي عُرِضَتْ عَنْ يَمِينِكَ فَطَرِيقُ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَأَمَّا الْجَبَلُ الزَّلَقُ فَمَنْزِلُ الشُّهَدَاءِ وَأَمَّا الْعُرْوَةُ الَّتِي اسْتَمْسَكْتَ بِهَا فَعُرْوَةُ الْإِسْلَامِ فَاسْتَمْسِكْ بِهَا حَتَّى تَمُوتَ فَأَنَا أَرْجُو أَنْ أَكُونَ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَإِذَا هُوَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [अल हसन बिन मूसा अल अस्यब] हमसे कहिन है [हम्मद बिन सलामा] से [अशिम बिन बहदालाह] से [अल मुसायब बिन रफी'] से [खरास्याह बिन अल हूर] उ कहिन, 'मैं मदीना पहुँचा, फिर कुछ पुरान लोगन के साथे मस्जिद के साथ बैठा। अलैहि वसल्लम। अचानक एक बूढा आपन बेंत पर टेक के आवा, तौ लोग कहिन, 'जेका स्वर्ग के निवासी का देखै का है, ई मनई का देखौ! ' तब ऊ व्यक्ति खड़ा होइगा अऊर मस्जिद के खम्भा के पीछे दुइ रकात नमाज पढ़िस। मैं फिर उनके पास गय अऊर उनसे कहिन, 'कुछ लोग तोहरे बारे मा इ तरह से अऊर इ तरह से बताइन हैं'। ऊ आदमी जवाब दिहिस, 'अल्लाह के स्तन्य, स्वर्ग अल्लाह के है अऊर ऊ जेका चाहे वहिमा प्रवेश देत है। जानौ कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय हमका एक सपना देखा, हम देखेन मानो एक आदमी हमसे मिला अऊर हमसे कहिस कि जा! ' फिर हम उनके साथ गयेन अऊर उ हमका एक उज्ज्वल अऊर बड़ी जगह पर ले गइन, फिर उ हमका अपने बाईं ओर एक रास्ता देखाइस, अऊर हम उ रास्ता से चलै चाहत रहेन। तौ जउन मनई मोर साथे रहा, ऊ कहिस, 'वास्तव मा तुम ओनके समूह से नाहीं हौ'। तब मोर दाहिने ओर एक रास्ता दिखाई दिहिस, तौ मैं रास्ता से तब तक चलत रहा जब तक कि मैं एक पहाड़ के पास नाहीं आवा जवने पर मैं चल नाहीं सकत रहा। अचानक ऊ आदमी हमार हाथ पकड़ लिहिस अऊर हमका धक्का दिहिस, अऊर अप्रत्याशित रूप से ई पता चला कि हम अपने चरम पर रहेन एहसे हम पीछे झुक नाहीं पाए रहेन अऊर न ही पकड़ पाए रहेन। पता चला कि चोटी के ऊपर एक लोहे का खम्भा रहा जवन सोने का रहा, तौ उ हमार हाथ पकड़ के फेंक दिहिस कि हम एक रस्सी से पकड़े रहेन। फिरि पूछिन- 'धरि लिहे हौ का? ' हम जवाब दिहेन, 'हाँ'। फिर ऊ खम्भा फेंक दिहिस तौ मैं रस्सी से पकरि गयेंव।' व्यक्ति ने कहा, 'तब हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, उ कहिन: 'तुमने एक अच्छा सपना देखा है। जौन जगह उजियार बड़का है ऊ महस्यार मैदान है। इ बीच, आपके बाईं ओर देखावा गा रास्ता नरक के निवासियन का रास्ता है, अऊर आप ओकरे निवासियन में से एक नाहीं हैं। इ बीच, आपके दाहिने तरफ देखावा गा रास्ता आपके दाहिने तरफ का रास्ता है, जवन कि स्वर्ग के लोगन का रास्ता है। जौन पहाड़ पे कदम न रखा जा सकत उहै शहीदन का धाम है, और जौन रस्सी से आप जौन रस्सी पकड़े हौ उहै इस्लाम है। तौ जब तक मौत न ले जाय तब तक कस के पकड़े रहौ।' यहिसे, मैं स्वर्ग के निवासी बनै ​​के आशा करत हौं'। पता चला कि बूढ़ा [अब्दुल्ला बिन सलाम] रहा'।