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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ibnu Majah : 3849

حَدَّثَنَا أَبُو يُوسُفَ الصَّيْدَلَانِيُّ مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ الْفَزَارِيِّ عَنْ أَبِي شَيْبَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُكَيْمٍ الْجُهَنِيِّ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ بِاسْمِكَ الطَّاهِرِ الطَّيِّبِ الْمُبَارَكِ الْأَحَبِّ إِلَيْكَ الَّذِي إِذَا دُعِيتَ بِهِ أَجَبْتَ وَإِذَا سُئِلْتَ بِهِ أَعْطَيْتَ وَإِذَا اسْتُرْحِمْتَ بِهِ رَحِمْتَ وَإِذَا اسْتُفْرِجَتَ بِهِ فَرَّجْتَ قَالَتْ وَقَالَ ذَاتَ يَوْمٍ يَا عَائِشَةُ هَلْ عَلِمْتِ أَنَّ اللَّهَ قَدْ دَلَّنِي عَلَى الِاسْمِ الَّذِي إِذَا دُعِيَ بِهِ أَجَابَ قَالَتْ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي فَعَلِّمْنِيهِ قَالَ إِنَّهُ لَا يَنْبَغِي لَكِ يَا عَائِشَةُ قَالَتْ فَتَنَحَّيْتُ وَجَلَسْتُ سَاعَةً ثُمَّ قُمْتُ فَقَبَّلْتُ رَأْسَهُ ثُمَّ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلِّمْنِيهِ قَالَ إِنَّهُ لَا يَنْبَغِي لَكِ يَا عَائِشَةُ أَنْ أُعَلِّمَكِ إِنَّهُ لَا يَنْبَغِي لَكِ أَنْ تَسْأَلِينَ بِهِ شَيْئًا مِنْ الدُّنْيَا قَالَتْ فَقُمْتُ فَتَوَضَّأْتُ ثُمَّ صَلَّيْتُ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ قُلْتُ اللَّهُمَّ إِنِّي أَدْعُوكَ اللَّهَ وَأَدْعُوكَ الرَّحْمَنَ وَأَدْعُوكَ الْبَرَّ الرَّحِيمَ وَأَدْعُوكَ بِأَسْمَائِكَ الْحُسْنَى كُلِّهَا مَا عَلِمْتُ مِنْهَا وَمَا لَمْ أَعْلَمْ أَنْ تَغْفِرَ لِي وَتَرْحَمَنِي قَالَتْ فَاسْتَضْحَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ إِنَّهُ لَفِي الْأَسْمَاءِ الَّتِي دَعَوْتِ بِهَا

हमसे [अबू यूसुफ अस शैदालानी मुहम्मद बिन अहमद अर रक्की] हमसे [मुहम्मद बिन सलामा] से [अल फजारी] से [अबू स्याबा] से [अब्दुल्ला बिन उकैम अल जुहानी] से ['ऐस्या] से कहिन है, उ कहिन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम को कहते सुना: 'अल्लाहुम्म इन्नी असलुक बियास्मिक अल्ताहीर अल्तायब अलमुबरक अलअहाब 'ईलायक अल्लाही 'इदा दुईत बीह 'अजाबत वयदायतभयतहैदय' ASTURHIMT BIH RAHIMT WA'IIDHA ASTUFRIJAT BIH FARRAJT QALAT WAQAL DHAT YAWM' 'हे अल्लाह, मैं तोहरे नाम से, पवित्र, सुंदर, धन्य अऊर अधिक प्रिय, माँगत हउँ कि जब तुमका ओकरे पास बोलावा जाई, त तुम देब, अऊर जब तुमसे पूछा जाई, अऊर जब तुमसे पूछा जाई, तौ देब ओकरे द्वारा दया के लिए तुम दयालु होब अऊर जब तुमसे ओकरे साथ एक रास्ता माँगा जाई त तुम एक रास्ता देब'। 'आइशा कहिन; एक दिन उ कहिन: 'हे आयशा, का तुम जानत हौ कि अल्लाह ने मोका एक अइसन नाम देखावा है कि जब बोलावा जाई तौ उ ओका देई?' 'आइशा कहिन; हम जवाब दिहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, मोर पिता के खातिर, तुम अऊर मोर महतारी, ओका मोका सिखावा'। उ कहिन: 'वास्तव में उ तोहरे लायक नाहीं है, हे 'ऐस्या'। 'आइशा कहिन; तौ मैं एक तरफ हट गय अऊर एक क्षण के लिए बैठ गय फिर मैं उठि गय अऊर ओकर मुँह घुमाय लिहेव, फिर मैं कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, सिखावा'। उ कहिन: 'निश्चित रूप से उ तोहरे लायक नाहीं है, हे ऐशा, यानी तोहका सिखावै के लिए, वास्तव मा उ तोहरे लायक नाहीं है अगर तू ओकरे साथ दुनिया से कुछ माँगौ'। 'आइशा कहिन; 'तो मैं उठि कै वजू किहेउ' फिर दुइ रकात पढ़ि के नमाज पढ़ी; 'हे अल्लाह, सचमुच मैं तोहसे प्रार्थना करत हउँ, हे अल्लाह, मैं तोहसे प्रार्थना करत हउँ, हे रहमान, मैं तोहसे प्रार्थना करत हउँ, हे परम दयालु, परम दयालु, अऊर मैं तोहसे तोहरे सब सुंदर नामन से प्रार्थना करत हउँ, जेका मैं जानत हउँ अऊर जेका मैं नाहीं जानत हउँ, कि तुम मोका माफ करौ अऊर मोरे ऊपर दया करौ'। 'आइशा कहिन; तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझ पर हँसिन अऊर कहिन: 'वास्तव मा ई दमा मा निहित है जेकरे साथ तुम पहिले नमाज पढ़े रहेव'।