Nabi mengampuni Hathib meskipun berkhianat membocorkan rencana Nabi kepada musyrikin karena menghargai peserta perang Badar
Imam Bukhari : 2851
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَوْشَبٍ الطَّائِفِيُّ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا حُصَيْنٌ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَكَانَ عُثْمَانِيًّا فَقَالَ لِابْنِ عَطِيَّةَ وَكَانَ عَلَوِيًّا إِنِّي لَأَعْلَمُ مَا الَّذِي جَرَّأَ صَاحِبَكَ عَلَى الدِّمَاءِ سَمِعْتُهُ يَقُولُبَعَثَنِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالزُّبَيْرَ فَقَالَ ائْتُوا رَوْضَةَ كَذَا وَتَجِدُونَ بِهَا امْرَأَةً أَعْطَاهَا حَاطِبٌ كِتَابًا فَأَتَيْنَا الرَّوْضَةَ فَقُلْنَا الْكِتَابَ قَالَتْ لَمْ يُعْطِنِي فَقُلْنَا لَتُخْرِجِنَّ أَوْ لَأُجَرِّدَنَّكِ فَأَخْرَجَتْ مِنْ حُجْزَتِهَا فَأَرْسَلَ إِلَى حَاطِبٍ فَقَالَ لَا تَعْجَلْ وَاللَّهِ مَا كَفَرْتُ وَلَا ازْدَدْتُ لِلْإِسْلَامِ إِلَّا حُبًّا وَلَمْ يَكُنْ أَحَدٌ مِنْ أَصْحَابِكَ إِلَّا وَلَهُ بِمَكَّةَ مَنْ يَدْفَعُ اللَّهُ بِهِ عَنْ أَهْلِهِ وَمَالِهِ وَلَمْ يَكُنْ لِي أَحَدٌ فَأَحْبَبْتُ أَنْ أَتَّخِذَ عِنْدَهُمْ يَدًا فَصَدَّقَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عُمَرُ دَعْنِي أَضْرِبْ عُنُقَهُ فَإِنَّهُ قَدْ نَافَقَ فَقَالَ مَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ اللَّهَ اطَّلَعَ عَلَى أَهْلِ بَدْرٍ فَقَالَ اعْمَلُوا مَا شِئْتُمْ فَهَذَا الَّذِي جَرَّأَهُ
हमका बतावा है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन हौस्याब अथ-थाई] हमसे कहिस है [हुसैम] हमसे [हुशैन] [सअद बिन उबैदा] से [अबू अब्दुर रहमान,] उन लोगन में से एक जे अली के ऊपर उथमान का प्राथमिकता देत रहें- उ इब्न अथिया से कहिन, उ उन में से एक जे उथमान का अलीथ- पर पसंद करत रहें; 'वास्तव मा मैं उ व्यक्ति हौं जे [आपके दोस्त] के साहस के बारे मा सबसे अच्छा जानत है - जेकर मतलब है अली - -रक्तपात- के मामलन मा, हम ओका कहत सुने रहेन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोका अज़ जुबैर के साथे भेजिन फिर उ कहिन; 'रौधा आओ - एक अउर संपादकीय रौधा खाह मा - अऊर वहाँ एक औरत से मिलौ जे हाथीब द्वारा दीन गा चिट्ठी लइके जात है'। तौ हम विचाराधीन रौधाह के स्थान पै गयेन अऊर फिर हम कहिन; 'चट्ठी कहाँ है?'। औरत कहिस: 'मोरे पास चिट्ठी नाहीं है'। हम कहेन: 'तुम चिट्ठी निकालौ या हम तोहरे कपड़ा उतार देब'। अंत मा उ आपन बेल्ट से चिट्ठी निकालिन - अपने बन मा दूसर स्थिति मा - फिर हथिब के सामने चिट्ठी लइ आए। हथिब ने कहा: 'मोरे साथ व्यवहार मा जल्दबाजी न करौ। सचमुच, मैं ई काम एहसे नाहीं करत हउँ काहे से कि मैं कृतघ्न हउँ। दरअसल, इस्लाम के प्रति मोर रवैया प्यार के अलावा अउर कुछौ सुधर नाहीं पावा है। जानौ कि महामहिम के कौनो भी मित्र के पास मक्का मा अपने परिवार अऊर संपत्ति के रक्षा करै के लिए रक्षक नाहीं है, जबकि मोर पास कौनो रक्षक नाहीं है। यहै कारन मैं ओनसे केहू का -अपने-रक्षक के रूप मा लेय चाहत हउँ। त पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अपने द्वारा बताए गए कारणन के पुष्टि किहिन - स्वीकार किहिन। तब उमर ने कहा: 'मुझे इजाजत दो कि मैं इस व्यक्ति का गर्दन काटूं काहे से कि उ निफाक -मुनाफिक- किहिस है'। तौ उ कहिन: 'का तुम नाहीं जानत हौ कि शायद अल्लाह बदर के युद्ध के योद्धाओं का देखिन रहैं, अऊर कहिन: 'जइसे तुम चाहौ करौ, सचमुच हम तुमका माफ कइ दिहेन'। -अबू 'अब्दुर रहमान- कहिन: 'यही बात ओका बहादुर बनावत है'।